ये लो भक्तो .... ! लालू यादव के देशहित और सामाजिक कार्यो की लिस्ट

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ये उन लोगो के लिए है जो कहते हैं कि लालू प्रसाद यादव केवल परिवार के लिए हीं सब कुछ किए हैं ।
1990 में जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा की स्थापना करवाई ताकि केवल लालू यादव का ही परिवार उसमे पढेंगे ।

1992 में विहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर का नाम बदलकर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नाम पर करने का दुस्साहस किया ।जिसे लगातार भुमिहार सामंत श्री कृष्ण सिंह के नाम पर करना चाहता था ।
10 जनवरी 1992 को सिद्धू कान्हू विश्वविद्यालय दुमका की स्थापना करवाई ताकि केवल लालू यादव का ही परिवार उसमे पढेंगे ।

17 सितंबर 1992 को विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग की स्थापना करवाई ताकि लालू यादव का परिवार हीं उसमे पढ़ेंगे ।

22 अक्टूबर 1992 को लालू यादव ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा की स्थापना करवाई ताकि केवल लालू यादव का ही परिवार उसमे पढेंगे ।

UPA1 के कार्य काल में उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़ो को आरक्षण दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने PHD करने शोध करने केवल लालू यादव के परिवार उसमें शोध करेंगे ।

1990 से पहले जहां चतुर्थ श्रेणी पद तक में पिछड़े वर्ग के कर्मचारी की संख्या नदारद थी वहीं लालू यादव ने मंडल कमीशन की सिफारिश को लागू करवाने में महत्वपूर्ण अग्रणी भूमिका निभाई जिससे ग्रुप ए की केन्द्रीय सेवा से लेकर निचले स्तर तक के नौकरी मे 27% आरक्षण को लागू करवाने का काम किया ताकि केवल लालू यादव के परिवार हीं नौकरी में जाएंगे

1990 से पहले तक जिस राजनीतिक वर्चस्व पर सवर्ण ब्राह्मण राजपुत भुमिहार का कब्जा था जहां वंचित दलित और पिछड़े समाज के लोगों की उपस्थिति न के बराबर थी उस जगह पर लालू यादव ने वंचित समाज के लोगों को विधानमंडल में पंहुचाने का काम किया।
न सिर्फ सदन में पहुंचाया बल्कि मंत्रीमंडल में भी जगह दी।

1990 से पहले तक ब्राह्मण भुमिहार और राजपुत सामंतवादियों के सामाजीक वर्चस्व को तोड़ने और वंचितों शोषितों, दबे कुचले लोगो को सामाजिक, मानसिक,धार्मिक गुलामी से आजादी दिलाने का काम लालू यादव ने किया ।जिस चप्पल को वो पहनकर उन सामंतो के दरवाजे के सामने से गुजर नहीं सकते थे उस व्यवस्था से आजादी दिलाने का काम किया 

साल 2001 में पंचायती राज को पुनः बहाल कर धरातल पर पंचायती शासन व्यवस्था को लागू करने का काम किया ।

जिस रेलवे को निजीकरण करने पर आज मोदी सरकार तुली है उसी रेलवे को 5 साल में लालू यादव ने रेल किराया घटाकर उस वक्त जब डीजल अंतराष्ट्रीय स्तर पर 148 डॉलर प्रति बैरल था रेलवे को 1 लाख करोड़ का शुद्ध लाभ देकर गये।भारतीय रेल को को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई ।
मुनीलाल राय

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