मुसलमानों से तुम्हारी नफरत तो छूटने से रही पर ये नास्तिकता और इंसानियत का ढोंग कब छोड़ोगे ?

जब पैरिस पे आत्मघाती अटैक हुआ था तो मुझे याद है आपकी इंसानियत कुलांचे मारते हुए कई कई बार घटनास्थल का दौरा कर आई थी । मुझे याद है तब आपने कई दिन तक आंसू बहाया था । आपका स्टेटस देख करके लगता था कि जैसे 15 दिन से आपने खाना नहीं खाया । लगभग 90% dp पर पेरिस मृतकों के लिए श्रद्धांजलि थी फिर आज आप किस बुनियाद पर यह सवाल कर रहे हैं के अलेप्पो से हमदर्दी हमें क्यों है ? महोदय हम आपसे सवाल करते हैं कि आपको यह सवाल करने का हक किसने दिया ? आज हम आपसे सवाल करते हैं आज आपने dp क्यों नहीं बदली ? आज आपकी हमदर्दी कहां चली गई ? आज आप इतने निष्ठुर कैसे हो गए ? क्या जो सीरिया में मारे जा रहे हैं वह इंसान नहीं हैं ? क्या सीरिया में मरने वाले सब के सब आतंकवादी है ? बागी हैं, विद्रोही हैं ? क्या उनके जान की कोई कीमत नहीं है ? आखिर क्या वजह है, क्या मरने वालों का कुसूर यही है कि वह मुसलमान हैं ? आप जश्न किस बात पर मना रहे हैं कि चलो मुसलमान मरा है ? आप कौन हो तो यह सवाल करने वाले कि मुसलमान किस बात पर खुश होंगे किस बात पर गमगीन होंगे ? क्या यह आप तय करेंगे कि हमें किस के लिए खुश होना है किसके लिए गमकीन होना है ? हमें याद है पेरिस हमलों के बाद आपने इस्लाम को कटघरे में खड़ा किया था पर हमने सीरिया हमले के लिए आपको किसी कटघरे में खड़ा नहीं किया है । 



मगर मैं पूछना चाहता हूँ जब हमलावर अमेरिका रशिया होता है फ्रांस जर्मनी होता है ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया होता है तब आप को मारने वालों से संवेदनाएं क्यों नहीं होती ? हम आपके पूछते हैं कि 9 11 के लिए आप dp चेंज कर देते हैं, पेरिस हमलों के बाद आप बौखला जाते हैं फिर क्या बात है की पूरा अफगानिस्तान तबाहो बर्बाद हो गया पूरा इराक पूरा लीबिया और आज सीरिया, लाखों लोग जिंदा जल गए, उनके चीथड़े हवा में उड़ गए, लाखों महिलाओं के बलात्कार हुए, करोड़ों लोग विकलांग हो गए, क्या वजह है आप उनके लिए गंभीर क्यों नहीं होते ? आपकी भावनाएं इतनी सिलेक्टेड क्यों हैं ? सुनिए अगर आपकी भावनाएं इतनी सेलेक्टिव हैं तो मैं चाहूंगा अगर दुनिया में कोई चरमपंथी है तो सौ डेसीबल का एक पटाखा तुम्हारे पिछवाड़े में जरूर फोड़े क्यूँ कि हर दूसरे स्टेटस में तुम जिस तरह अट्हास कर रहे हो ठीक वैसा ही अट्हास कुछ कामरेड और संघियों ने तब भी किया था जब मीना भगदड़ और क्रेन हादसे में कुछ लोग मारे गए थे । मैने पहले भी कहा था लाशों पर अट्हास इंसान नहीं पिशाच करते हैं आज फिर कह रहा हूँ तुम कामरेड हो या नास्तिक तो छोड़ो इंसान भी नहीं हो ... पिशाच हो पिशाच ।



अब ये मत कहना कि असद लोकतांत्रिक है, तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ कि असद तानाशाह है, ये मत कहना कि वहां से आने वाली नरसंहार की ख़बरें फेक हैं या अमेरिकी प्रोपेगेंडा हैं क्यूँ अबतक आईसिस से जुड़ी उसकी हैवानियत भरी ख़बरें भी उसी सोर्स से आती थीं और उन्हीं ख़बरों की बुनियाद पर हम आप आईसिस को आतंकवादी मानते हैं । उसी सोर्स से मिली खबरों के बाद आप इस्लाम का मूल्यांकन करके हमसे जवाब मांगते रहे हैं ।
मुसलमानों से तुम्हारी नफरत तो छूटने से रही पर ये नास्तिकता का ढोंग ये दोगलापन कब छोड़ोगे ?
-Abrar Khan