राजस्थान में सवर्णों का 50 % आरक्षण खत्म, मेरिट से करना होगा मुकाबला

आरक्षण आन्दोलन फाइल फोटो
जयपुर। राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा संयुक्त भर्ती परीक्षा में राजस्थान हाई कोर्ट ने सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को झटका देते हुए ओबीसी वर्ग को भी सामान्य श्रेणी की मेरिट में फाइट करने का निर्णय दिया है। अब आरएएस भर्ती 2013 में राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश से साक्षात्कार में शामिल हुए अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग के 507 अभ्यर्थियों में से चयनित अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी का मानते हुए नियुक्ति मिलेगी। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के साथ वरीयता सूची कार्मिक विभाग को भेजने की तैयारी की है।

आरएएस 2013 में ओबीसी और एसबीसी के 507 अभ्यर्थियों में से चयनित अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी का मानते हुए नियुक्ति देने से सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को करारा झटका लगा है। 
  

आपको बता दें कि आरपीएससी की ओर से 15 जून को घोषित आरएएस मुख्य परीक्षा 2013 के परिणाम में सामान्य वर्ग की कटऑफ 350, ओबीसी की 381 और एसबीसी की कट ऑफ 364 अंक रही। आयोग की ओर से ओबीसी में 381 और एसबीसी में 364 से कम कट ऑफ वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था।

जबकि सामान्य वर्ग में 350 कट ऑफ तक के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया गया। आयोग के निर्णय के खिलाफ एक ओबीसी अभ्यर्थी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका पर उच्च न्यायालय के आदेश से आयोग को एसबीसी और ओबीसी में भी 350 कटऑफ तक प्राप्तांक वाले कुल 507 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया।


उच्च न्यायालय ने सुरज्ञान सिंह बनाम राज्य सरकार के मामले में अंतरिम आदेश देते हुए 507 अभ्यर्थियों में से चयनित अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग का मानते हुए नियुक्ति देने को कहा है। आरपीएससी ने राज्य सेवा के 3446 और अधीनस्थ सेवाके 644 पदों के लिए 2 हजार 352 अभ्यर्थियों की वरीयता सूची और उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश कार्मिक विभाग को भेजने की तैयारी की है। 


कार्मिक विभाग वरीयता सूची से राज्य एवं अधीनस्थ सेवाओं के रिक्त पदों पर श्रेणीवार आरक्षण, अभ्यर्थियों की ओर से दी गई प्राथमिकता और उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देगा।(नेशनल दस्तक से साभार)