मुस्तकीम सिद्दीकी का आम लोगो को खुला ख़त, खामोश मूलनिवासी मोलिसाबो को भी करारा जवाब साबित हुआ

22 अक्टूबर को हम कोई कैंडल मार्च नही निकालेंगे , 22 अक्टूबर को हम कोई इन्साफ की भीख नही मांगेगें , 22 अक्टूबर को हम कोई फरयाद नही करेंगे , 22 अक्टूबर को हम कोई दुखड़ा नही सुनायेंगे | 22 अक्टूबर को हम कोई अभियोग नही करेंगें |
हम अब कोई शिकायत नही करना चाहते हैं , हम अब और नही रोना चाहते हैं , हम अब और अपने घरों में मातम नही मनाना चाहते हैं , हम अब और अपनों को गौआतंकियों की बली नही चढ़ाना चाहते हैं , हम अब और कोई अखलाक और मिन्हाज़ की तरह तड़प तड़प कर मरते नही देखना चाहते हैं | हम अब और कोई मासूम को खोना नही चाहते हैं |
हम जानते है हम गरीब हैं और अमीर भी हे , हम अशिक्षित भी और पढे लिखे भी हैं , हम मदरसों में बोरी और चटाई पर बैठ कर पढ़ते और बडी बडी युनीवरसीटीस मे भी पढते हैं , हम बेरोजगार भी है और रोजगार वाले भी है , हम ठेलों पर फल भी बेचते हैं और बड़े बडे कारोबार भी करते हे , हम जमीन पर बैठ कर सब्जियां बेचते हैं और जमीन से उगाते भी हे, हम सड़क के किनारे पंक्चर भी बनाते हैं और बहुत बडी बडी कंपनीया भी चलाते हे, हम बहुत कुछ करते हे 



हम किसी का कुछ नही बिगाड़ते हैं , हम किसी पर अत्याचार भी नही करते हैं , हम किसी के विरुद्ध कोई षड्यंत्र भी नहीं रचते हैं , हम किसी की भावनाओं से भी नही खेलते है , हम किसी के निजी आस्था का विरोध भी नही करते हैं , हम किसी धर्म के कानुन पर छेड़छाड़ भी नही करते हैं , हम किसी के विरुद्ध आग भी नहीं उगलते है |
लेकिन फिर भी हमें आराम से नही रहने दिया जाता है , हमें शांती से नही जीने दिया जाता है , हमारा चैन और सकून को बर्बाद कर दिया जाता है , हमारी छोटी मोटी पूंजी को भी लुट लिया जाता ही , हमारी दुकानों को जब मर्जी हो जला दिया जाता है , हमारे घरों को जब मर्जी हो लुट लिया जाता है , हमारी माँ और बहनों की इज्ज़त के साथ खेल कर विडियो वायरल किया जाता है , हमारे घरों में घुस कर बलात्कार किया जाता है , हमारे घरों में घुस कर हमें मार दिया जाता है | मीडिया खामोश रहती है , कानुन के रखवाले हमें ही कसूरवार बना देती है | सरकारे इन्साफ नही देती है | हम देश द्रोही कहलाते हैं , हम पर शक किया जाता है , हम पर झोटे आरोप लगाये जाते हैं , हम को आतंकवाद के नाम से टैग किया जाता है , हम पर दहशतगर्दी का इलज़ाम लगाया जता है , हम से हमारा हक छिनने की बात की जाती है , हमसे हमारा देशभक्ती का सबुत मांगा जाता है, हमारी नागरिकता खत्म करने की बात की जाती है |



इस मजबूरी , मेहनत और मोशक्कत के बाद भी अगर हम में से कोई शोहरत पाता है , कामयाबी हासिल करता है , उचे पदों पर पहुँचता है , देश के लिए कुर्बान होता है फिर भी उसे मिटाने की साज़िशे होती है , उसे भी नही बखशा जाता है , चाहे वह ब्रिगेडियर शहीद उस्मान हों , शहीद वीर अब्दुल हमिद हो , उपराष्ट्रपती हामीद अंसारी हो, ए पी जे कलाम हो , आमिर और शाहरुख़ खान हो , शहीद शाहिद आजमी हो , डीएसपी जियाउल हक हो , मोहसिन हो और भी बेगीनती नाम है |
दोस्तों अब घर पर बैठ कर सिर्फ दुआएं मत करो , दोस्तों अब ख़बरें सुनकर सिर्फ दुख और दर्द का इज़हार मत करो , दोस्तों अब सिर्फ सोशल मीडिया पर गम और गुस्से का इज़हार मत करो, दोस्तों अब अपने नेताओं की तरफ मत देखो , दोस्तों अब सिर्फ अपने फिरकों की तरफ मत देखो |
दोस्तों अब हमें खुद अपनी लड़ाई लडनी है , हमें किसी लीडर का इंतज़ार नही करना है , हमें किसी ख़ास वक़्त का इंतज़ार नही करना है , हमें किसी के गोदों में नही खेलना है , हो सकता है हमें इस लड़ाई में अपने जाने भी देनी हों , हो सकता हैं हम में से कोई शहीद शाहिद आजमी की तरह शहीद कर दिया जाय या किसी को गायब कर दिया जाय लेकिन हमें डरना नहीं है , लड़ना है , अड़े रहना है , गौआंतकियों से देश को आज़ाद कराना है | देश को भयमुक्त करना है , जीने की आजादी कायम करनी है |



इसलिए 22 अक्टूबर को हम सड़कों पर उतर रहे हैं , मानवता को कलंक करने वाले गौआतंकियों के विरुद्ध , 22 अक्टूबर को हम सरकार को सीधा संदेश देने जा रहे है : गौआतंकियों को सज़ा दो या सत्ता से बहार जाओ , अपने अधिकार की रक्षा के लिए , अपनी जान , माल , इज्ज़त की , देश में भयमुक्त वातावरण की स्थापना के लिए |
दोस्तों अगर आप आज सड़कों पर नही उतरोगे तो कल फरीद खान की तरह सड़कों पर दौड़ा दौड़ा कर मार दिए जाओगे , दोस्तों अगर आज आप ऑफिस से नही निकलोगे तो कल मोहसिन की तरह ऑफिस के रास्ते में कुचल दिए जाओगे , दोस्तों अगर आज आप घर से नही निकलोगे तो कल अखलाक की तरह घर में कुचल दिए जाओगे , दोस्तों अगर आज आप दूकान से नही निकलोगे तो कल मिन्हाज़ की तरह दूकान पर ही पिट पिट कर मार दिए जाओगे |



आप हमारा साथ दो, हम इसे देशव्यापी आन्दोलन बनाकार सत्ता पर बैठी बहरी और गोंगी सरकार से अपना अधिकार लेकर रहेंगे , अधिकार जीने , अधिकार अपनी रक्षा , अधिकार अपनी सुरक्षा | (मुस्तकीम सिद्दीकी के फेसबुक वाल से)