हम आपस में किडनिया बदलते है. हिन्दू मुस्लिम का जहर तो चन्द नेता और मीडिया घोलता है.

बागवान टाकली, तालुका देगलूर जिला नांदेड में एकता का प्रतिक.
 सिर्फ 15 फूट के फासले पर है मंदिर और मस्जिद
हम सब एक है , फसाद की जड़ तो चाँद नेता और मीडिया है. यह दोनों को भी हमेशा चर्चा में रहना पसंद है. खुद का चर्चा, प्रचार प्रसार करने के लिए आम लोगो में जहर घोलना और भोले-भाले लोगो को आपस में भिडाने का काम यह लोग करते है. मैं एक मुसलमान हूँ लेकिन मेरे अच्छे और भरोसेमंद दोस्त बहुत सारे गैरमुस्लिम भी है. हर काम में वह मेरे साथ होते है. साथ सहयोग करते है. लेकिन हमने कभी आपस में लड़ाई झगडा तो दूर की बात लेकिन हिन्दू मुस्लिम फसाद के बारे में सोचा भी नहीं.

हम सब एक है का प्रचार करते हुए मौलाना और एक संत
कुछ नेता लोग है जो भोले भाले लोगो में जातीयवाद का जहर घोलते है. किराए के टट्टू द्वारा फसाद फैलाते है और एक जाती या धर्म विशेष को बदनाम कर अपना उल्लू सीधा करते है. चुनाव के दौरान तो शतप्रतीषद साम्प्रदाईक हिंसा होती ही है. यह आम बात है.

कई मिसाले पेश की जा सकती है जो सभी जाती एवं धर्म में एकता के प्रतिक की, यह नांदेड जिले के देगलूर तालुका के एक बागवान टाकली नामक गाँव की तस्वीर है जो एकता का प्रतिक है. मंदिर और मस्जिद में सिर्फ 15 फूट का फासला है. ना कभी मंदिर वालो को मस्जिद से तकलीफ हुई ना कभी मस्जिद वालो को मंदिर से तकलीफ हुई और ना कभी मंदिर वालो और मस्जिद वालो में कोई फसाद हुआ. ऐसी कई हजार उदाहरण है जो हमारी एकता को दर्शाते है.

हाल ही में एक गैरमुस्लिम और एक मुस्लिम ने अपनी किडनी आपस में अदला बदल की है. अगर यह लोग धार्मिक दुश्मन होते तो ऐसा हरगिज ना करते. आएये देखते है अमर उजाला की एक रिपोर्ट
एक हिंदू ने मुस्‍लिम से किडनी बदलकर कायम की मिसाल

नागपुर में एक हिंदू व्यक्ति ने मुसलमान से किडनी स्वैप करके नयी मिसाल कायम की है। दरअसल, किडनी के दो मरीज थे एक तीस वर्षीय हिंदू खामगांव से और एक 35 वर्षीय मुसलमान कांपटी से, दोनों काफी दिनों से डायलीसिस पर चल रहे थे।

उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी। उन दोनों के ब्लडग्रुप किसी भी परिजन से न मिल पाने के कारण डॉक्टरों की सलाह पर दोनों परिवार वालों ने किडनी की अदला-बदली करने का फैसला लिया।

खामगांव के मरीज की बहन वॉकहार्ड अस्पताल के यूरोसर्जन डॉक्टर संजय कोल्टे की तारीफ करते नहीं थक रही हैं। वह कहती हैं कि डॉक्टर साहब न होते तो उसके भाई की जान नहीं बच पाती। जात-पात तो मनुष्यों की बनायी दूरियां हैं। सभी इंसानों का शरीर तो बराबर है। खामगांव वाले परिजन के पास पैसा न होने की वजह से उन लोगों ने चंदे से इकट्ठा हुए धन से किडनी का ऑपरेशन करवाया।

अफवाओ का पीछा ना करे, एक इंसान दुसरे इंसान से मुहोब्बत करे, सब पुलिसवाले एक जैसे नहीं होते इसलिए पुलिस से मदत ले और पुलिस को मदत करे, न्यायालयों पर विशवास करे, 
जय भारत
-अहेमद कुरेशी-