दाढी रखकर विजय माल्या देश को लूटकर भाग सकता हैऊ, तो असद कॉलेज क्यों नहीं जा सकते ?

हम जबतक ढ़ोंगी सेक्युलर दलों का आरएसएस से आंतरिक गठबंधन का पूर्णरूप से खुलासा न कर दे तबतक बुर्क़ा और दाढ़ी पर कुछ भी नहीं लिखेंगे.

Soni Sanni 
जब से सुना है कि #असद को दाढ़ी रखने पर इंस्टिट्यूट से निकाल दिया तब से #विराट_कोहली #रविन्द्र_जडेजा #लोकेश_राहुल की आँखों से नींद गायब है। #अमित_शाह #मोदी भी कुछ सहमे सहमे से है। #मनमोहन_सिंह खुश है हमे क्या? सबसे ज्यादा खुश #आसाराम_बापू को देखा गया है शायद #दाढ़ी के वजह से उन्हें भी निकाला जाए 
नावेद चौधरी ने इसमे क्या गलत लिखा है? 


आप मेरे चहरे पर दाढ़ी नहीं देख सकते.
आप मेरे सर पर टोपी नहीं देख सकते.
आपको मेरी प्लेट में पड़े उस खाने से भी दिक़्क़त है.
आपको बुर्क़ा और हिजाब से भी परेशानी है.
आपको मस्जिद के उस लाऊड स्पीकर से भी परेशानी है जिससे आज़ान की आवाज़ आती है.
आपको परेशानी मेरे क़ुरबानी करने से भी है..
आप जमात के लोग और क़ाफ़िले से चिढ़ते हैं.
आपको मेरे इज्तेमा से भी बेहद परेशानी है.
उसही के विप्रीत......!!
मुझे आपके शंकर भगवान से लेकर मंदिर के महंत और शंकराचार्य की दाढ़ी से दिक़्क़त नहीं.
मुझे आपके माथे पर लगे उस तिलक से भी परेशानी नहीं.
मुझे आपके शराब पीने और परोसने पर भी आपत्ति नहीं.
मुझे उस पंडाल और उस माता की चौकी से भी दिक़्क़त नहीं जिससे भजन कीर्तन की आवाज़ आती हैं.
मुझे उस घूँघट प्रथा से भी रत्ती भर परेशानी नहीं जो आपकी माता बहने गांव में करतीं हैं.
और नाही मुझे उस बलि प्रथा से भी दिक़्क़त नहीं जो आप काली माता को को भेंट करते हो..?
मुझे आपके कांवड़िया बंधुओ से भी कोई परेशानी नहीं.
मुझे आपके समागमों से भी कोई बाधा नहीं होती.
जानते हैं क्यों.........????
क्योंकि मेरा इस्लाम मुझे जितनी इज़्ज़त अपने लिए करने को कहता है उतनी ही दुसरे मज़हबों का सम्मान देने का हुक़्म देता है.
और हाँ आपकी बातों से यही लगता आपको उपरोक्त बातों से नही बल्कि #इस्लाम से दिक़्क़त है,लेकिन जान लीजिए इस्लाम आपकी मुख़ालफ़त के बाद भी बढ़ रहा है और बढ़ता ही जा रहा है।