इस्लाम के आने के बाद लड़कियां सुरक्षित हो पाईं

जब अरब देश में इस्लाम नहीं आया था, तब वहां कई तरह की बुराइयां आम थी, जैसे शराब पीना, जुआ खेलना, ब्याज का कारोबार करना, कमज़ोरों पर ज़ुल्म करना, छोटी सी बात पर भी किसी का क़त्ल कर देना और इसके अलावा एक और बड़ा गुनाह वो करते थे की अगर उनके यहाँ बेटी पैदा होती तो उसको ज़िंदा दफ़न कर देते थे. क्योंके बेटी का पैदा होना वो शर्म की बात समझते थे.
इस्लाम के आने से पहले, उस जाहिलियत के ज़माने में लोग अपनी मासूम बच्चियों को सामने बिठाकर कब्र खोदते थे, फिर उस बच्ची के हाथ में गुड़िया देकर, उसे मिठाई का टुकड़ा थमाकर, उसे नीले पीले और सुर्ख रंग के कपड़े देकर उस कब्र में बिठा देते थे, बच्ची उसे खेल समझती थी, वो क़ब्र में कपड़ों, मिठाई के टुकड़ों और गुड़ियाओं के साथ खेलने लगती थी फिर ये लोग अचानक उस खेलती, मुस्कुराती और खिलखिलाती बच्ची पर रेत और मिट्टी डालने लगते थे। बच्ची शुरू-शुरू में उसे भी खेल ही समझती थी, लेकिन जब रेत मिट्टी उसकी गर्दन तक पहुँच जाती तो वो घबराकर अपने वालिद, अपनी माँ को आवाजें देने लगती थी, लेकिन ज़ालिम वालिद मिट्टी डालने की रफ्तार और तेज कर देता था। ये लोग इस अमल के बाद वापस जाते थे तो उन मासूम बच्चियों की सिसकियाँ घरों के दरवाजों तक उनका पीछा करती थीं, लेकिन उन ज़ालिमों के दिल स्याह हो चुके थे जो नर्म नहीं होते थे।



लेकिन जब इस्लाम आया और लोगों ने इस्लाम कुबूल करना शुरू किया तो फिर ये बुराई वहां से ख़तम हो पाई, इस्लाम आने के बाद औरत को बाप की विरासत में हक़ दिया गया, इस्लाम ने औरत को ये इजाज़त दी के अगर शोहर से बहुत ज़्यादा परेशान है तो तलाक़ मांग सके, इस्लाम ने औरत को ये हक़ दिया के तलाक़ के बाद या शोहर के मरने के बाद दूसरी शादी कर सकती है, इस्लाम ने औरत को महर दिलवाया, (शादी के बाद एक राशि लड़का अपनी बीवी को देता है, जिसको महर कहते हैं, वो लड़की उस पैसे का जो चाहे वो कर सकती है), इस तरह इस्लाम ने औरत को कई तरह से इज़्ज़त से नवाज़ा।



संक्षिप्त में देखिये, इस्लाम ने औरत को कैसे इज़्ज़त बख्शी
बेटी के रूप में =========
• अल्लाह फरमाता है के जब में किसी से खुश होता हूँ तो उसके यहाँ लड़की पैदा करता हूँ.
• जब किसी के यहाँ बेटी पैदा होती है तो अल्लाह उसके रोज़गार में तरक्की दे देता है.
• हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम) ने फ़रमाया जिसका मफ़हूम ये है के जिसके यहाँ लड़की पैदा हो, और वो उसको अच्छी तरह पाले पोसे और अच्छी जगह उसकी शादी कर दे तो उस पर जन्नत वाजिब हो जाती है, मतलब वो जन्नत में ज़रूर जाएगा.
माँ के रूप में =========
• हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम) ने फ़रमाया जिसका मफ़हूम ये है के माँ के पैरों के नीचे जन्नत है, मतलब माँ की खिदमत करोगे तो जन्नत ज़रूर मिलेगी
बीवी के रूप में ================
• कुरान में अल्लाह ने फ़रमाया = और उनसे (औरतों) से अच्छा व्यवहार करो (Surah Nisa,Aayat 19)
• हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम) ने फ़रमाया जिसका मफ़हूम ये है के तुममे सबसे ख़राब वो इंसान है जो अपनी बीवी को सताए (तबरानी)



जहाँ आज इस्लाम ने औरत को इतनी इज़्ज़त बख्शी है, लेकिन कुछ लोग दुष्प्रचार करते हैं, वो इस तरह की बातें छुपा लेते हैं, और सिर्फ हिजाब (पर्दा) वाली बात को ही उठाते हैं, जबके पर्दा अल्लाह का हुक्म है, और अगर कोई लड़की इसको मानती हैं तो वो अल्लाह का हुक्म पूरा कर रही है, अपने पालनहार की बात मानना क्या गलत है, जो लडकिया पर्दा करती हैं, अगर उनसे कोई कहे के पर्दा न किया करो तो उनको अच्छा न लगेगा क्योंके वो परदे में खुद को बहुत सुरक्षित महसूस करती हैं. शरीयत के दायरे में रहकर लड़की शिक्षा हासिल करे, उसको शिक्षा लेने से नहीं रोक गया. मुस्लिम लड़कियों के स्कूल तो हैं ही, बल्कि कई मदरसे भी लड़कियों के लिए चलाई जा रहे हैं