नोटबंदी पर सरकार को कोर्ट से झटका

KOLKATA: NOTE BAN पर देश भर में पिछले दस दिनों से अफरातरफरी मची हुई है। जनता लाइन में लड़ रही है तो नेता संसद में लड़ रहे हैं।

असल परेशानी तो जनता को ही हो रही है जिन्हें बैंक वाले कोई ना कोई बहाना कर चक्कर कटवा रहे हैं। अब नोट बैन पर सरकार को कलकता हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने सरकार से कहा है रोज रोज बदलाव अच्छे नहीं होते। 

जज ने कहा मेरा खुद का बेटा डेंगू से पीडित है उसे इलाज नहीं मिल पा रहा है। लोगों को परेशानी हो रही है। इसका जवाब कौन देगा। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से नोटबंदी पर  जवाब मांगा है। कोर्ट ने साथ ही सरकार को फटकार लगाकर कहा कि वो रोज रोज फैसले ना बदले।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में 4 अलग-अलग लोगों ने याचिका दाखिल कर सरकार के इस फैसले को रद्द करने की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ लोगों की असुविधा पर रिपोर्ट मांगी । एक याचिकाकर्ता आदिल अल्वी की तरफ से कपिल सिब्बल ने बहस की थी।


याचिकाओं में क्या-क्या
इन याचिकाओं में कहा गया था कि सरकार के इस फैसले से नागरिकों के जीवन और व्यापार करने के साथ ही कई अन्य अधिकारों में बाधा पैदा हुई है। मुख्य न्यायधीश टी.एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ इस याचिका पर सुनवाई की। नरेंद्र मोदी सरकार के आठ नवंबर के फैसले के खिलाफ चार याचिकाएं दायर की गईं थीं। सरकार ने आठ नवंबर की मध्यरात्रि से 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से वापस लेने का फैसला किया। इनके स्थान पर 500 और 2000 रुपये का नया नोट जारी किया गया है।


किस-किस ने डाली याचिका
सरकार के फैसले के खिलाफ दायर चार याचिकाओं में दो जनहित याचिकाएं दिल्ली के वकील विवेक नारायण शर्मा और संगम लाल पांडे ने दायर की जबकि दो अन्य याचिकाएं दो व्यक्तियों एस. मुथुकुमार और आदिल अल्वी ने दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर को इन याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने की सहमति जता दी थी।
सरकार पर आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार के अचानक लिए गए इस फैसले से चारों तरफ अफरातफरी मच गई और लोगों को काफी परेशानी हुई है। ऐसे में आर्थिक मामलों के विभाग की संबंधित अधिसूचना को या तो खारिज कर दिया जाना चाहिए और कुछ समय के लिए स्थगित रखा जाना चाहिए।


सरकार क्या कहती है
केंद्र सरकार की तरफ से न्यायालय में कैविएट याचिका दाखिल की गई इसमें कहा गया है कि अगर पीठ नोट पर पाबंदी को चुनौती देने वाली किसी याचिका पर सुनवाई करती है और कोई आदेश जारी करती हैं तो उससे पहले केंद्र का पक्ष भी सुना जाना चाहिए।(लाइवइंडिया से साभार)