व्यापम को दबाने के लिए कराया गया एनकाउंटर

भोपाल। भोपाल सेंट्रल जेल से भागे आठ सिमी आतंकियों के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद इस मामले पर सवाल उठने भी शुरू हो गए हैं। मध्य प्रदेश की भोपाल सेंट्रल जेल में जेलकर्मी को मारकर फरार हुए सिमी के आठों आतंकी एनकाउंटर में ढेर किए जाने से पहले करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके थे। जेल से बाहर आते ही उन्होंने न सिर्फ हथियार जुटाए, बल्कि लंबी दूरी तय करने के इरादे से वे स्पोर्ट्स शूज, ड्राई फ्रूट्स और जीपीएस वॉच से भी लैस थे।

ये आतंकी किन-किन हथियारों से लैस थे, एनकाउंटर के जानकारी देते हुए भोपाल के आईजी योगेश चौधरी ने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही वे इस बारे में बताएंगे। आईजी योगेश चौधरी ने बताया कि गांववालों के जरिए उन्हें एक इनपुट मिला था, जिसके बाद जिला पुलिस, सीटीसी और एसटीएफ की टीमों ने अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया था।



उन्होंने बताया कि पुलिस ने अचारपुरा इलाके के मणिखेड़ा इलाके के पठारी इलाके में इन आतंकियों को ट्रेस किया। ये आतंकी रात के अंधेरे में जंगलों को पार करते हुए यहां तक पहुंचे थे। पुलिस टीम को देखकर ये भागने लगे और फिर इन्होंने जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। भोपाल के आईजी के मुताबिक पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें ये सभी आठों आतंकी मारे गए।

भोपाल पुलिस ने इन सभी आतंकियों के जवाबी फायरिंग में मारे जाने का दावा किया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन आतंकियों के मददगार कौन हैं? हालांकि पुलिस के इन दावों पर सवाल भी उठ रहे हैं। पुलिस के दावों पर यकीन किया जाए तो इन आतंकियों के पास हथियार और स्पोर्ट्स शूज थे। यही नहीं इन आतंकियों ने हाइटेक जीपीएस वॉच भी पहनी हुई थी। उनके पास खाने पीने का सामान भी था। सवाल उठता है कि जेल से भागने के चंद घंटों के भीतर ही आतंकियों ने ये चीजें कैसे हासिल कर लीं? 



आप और कांग्रेस, दोनों ने ही पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। आप ने जहां सभी आतंकियों के एक साथ भागने और एक ही जगह मारे जाने पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस ने इस मामले में जुडिशल जांच की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम को साजिश बताते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने शक जताया कि आतंकियों को किसी योजना के तहत जेल से भगाया गया। वहीं, कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, 'चूंकि अब सारे आतंकी मारे जा चुके हैं और हमें कोई जानकारी नहीं मिल सकती, इसलिए इस बात की जुडिशल जांच होनी चाजिए कि वे कैसे भागे।'

आम आदमी पार्टी नेता और विधायक अलका लांबा ने भी मध्य प्रदेश सरकार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकी मारे गए, अच्छा हुआ। 8 आतंकियों का एक साथ भागना। फिर कुछ घंटों बाद एक ही साथ एनकाउंटर में मारे जाना। सरकार के पास 'व्यापम' फॉर्मूला भी था।