पत्थर को पसीना आजाये ऐसी देते है बेगुनाह मुसलमानों को सजा

खालिद मुजाहिद जमात इस्लामी हिन्द के नाजिम इलाका रीजनल प्रबंधक मौलाना जहीर आलम फलाही के भतीजे और जमियातुस्सालिहात, मडियाहू, जिला जौनपुर में शिक्षक थे। उन्हें 16 दिसम्बर 2007 को उनके घर के पास से अगवा किया गया और पुलिस की झूठी कहानी कबूल करने के लिए जिस तरह के जुल्म ढाए गए, दुनिया के बड़े बड़े जालिम भी दांत तले ऊँगली दबा ले। पत्थर को पसीना आ जाए, लोग खून के आंसू बहाने लगे............!

खालिद मुजाहिद ने अपनी दर्द भरी दास्तान आरडी निमेष के सामने जिन शब्दों में पेश की वह निमेष कमीशन की रिपोर्ट में इस तरह दर्ज है:



"नंगा करके मारा पीटा जाता था। दाढ़ी के बाल नोचे जाते थे। दीवार के सहारे बैठा कर टांगो को चौड़ा किया जाता था। एक पैर पर पुलिस वाला खड़ा होता दूसरे पैर पर दूसरा पुलिस वाला खड़ा होकर अपना पेशाब हमारे मुंह में डालते। पखाने के मुक़ाम पर पेट्रोल डालता, हमारे पेशाब की नली में धागा बांध कर पत्थर लटकाया जाता था और उसे सिगरेट से दागा जाता था। सूअर के गोश्त का कबाब मुंह में ठूंसा गया, बर्फ की सिल पर लिटा कर नाक और मुंह में पानी पिलाया गया। करंट के झटके लगाये गए। हमारी कमर से रस्सी बांध कर ऊपर छत में रस्सी फंसा कर खिंचा जाता था और नीचे पानी भरे टब में डुबकी लगवाई जाती थी। यह सब बारी बारी चार चार घंटे के अंतराल से किया जाता था। यह कहा जाता था की कचेहरी बम ब्लास्ट इसी ने किया है और जब मैं जब यह कहता कि जो काम मैंने नहीं किया है उसकी जिम्मेदारी कैसे ले लू तो उस पर यह जालिम कहते कि जिम्मेदारी ले लो वरना तुम्हारी माँ और बीबी को उठा लाएंगे और तुम्हारे सामने ........ ""
यह वाक़ियात पढ़कर रोना आएगा।
ऐसे जालिम व्यवस्था को जल्द से जल्द बदलना होगा।
(प्रो. विलास खरात इनकी फेसबुक वाल से साभार)