टिके के नाम से मुस्लिम लडकियों को बनाया जा रहा है बाँझ

‘मुस्लिम युवतियों को हमेशा के लिए बाँझ बना देने वाला टीका लगाए जाने’ का दावा इन दिनों सोशल मीडिया पर ख़ूब शेयर हो रहा है। ऐसे ही दावे जनवरी में भी सामने आए थे। अभी भी यह सिलसिला जारी है। देखें, कि फ़ेसबुक पर कुछ तस्वीरों की मदद से क्या दावा किया जा रहा है।
यह पोस्ट फ़ेसबुक पर ज़बर्दस्त वायरल हुआ है। इसमें दावा किया गया है, ‘केरल में यह इन्जेक्शन केवल मुस्लिम लड़कियों को दिया जा रहा है…इसके साइड इफ़ेक्ट्स ये हैं कि लड़कियों को कभी भी औलाद नहीं होगी…सो गुज़ारिश है कि इन तस्वीरों को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें’।
जिस दवाई को ‘लड़कियों को हमेशा के लिए बेऔलाद बना देनेवाली’ बताया है, उसकी तस्वीर भी दी गई है। इसमें इसे पोलियो ड्रॉप बताया गया है।





यह ग़लत जानकारी है। Measles and Rubella Vaccine live I.P. पोलियो ड्रॉप नहीं बल्कि खसरा-चेचक के वायरस को ख़त्म करनेवाला टीका है। वैसे तो इससे संबंधित जानकारी आसानी से गूगल पर मिल जाएगी, लेकिन फ़ेसबुकिया दावों को सच मानने की आदत से छुटकारा मिले तो सच जानने की फ़ुरसत मिले। हम आपको बता देते हैं।
World Health Orgnization (WHO) की वेबसाइट पर जाकर पता चलता है कि Serum Institute of India Pvt. Ltd. नाम की कंपनी इसकी मैन्युफ़ैक्चरिंग करती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी टीका उत्पादन कंपनी है। साथ ही यह भारत की सबसे बड़ी बायोटेक्नॉलजी कंपनी है। Measles and Rubella Vaccine live I.P. इसी का एक प्रॉडक्ट है जिसे मार्केट में MR-VAC के नाम से बेचा जाता है।
भारत (बाक़ी जगह भी) में बच्चों और नवयुवकों को यह टीका लगाया जाता है। स्कूलों में यह कैंपेन इसलिए चलाया जाता है क्योंकि वहाँ एक ही समय में बड़ी संख्या में बच्चे और नवयुवक मौजूद रहते हैं। अभियान की सफलता के लिए ज़रूरी है कि ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को यह टीका लगाया जाए। किसी भी धर्म या समाज के लोगों को यह वहम अपने दिमाग़ से निकाल देना चाहिए कि यह टीका केवल उनके बच्चों को किसी तरह का नुक़सान पहुँचाने के लिए लगाया जा रहा है।

हम तो इस झूठ को सच मानकर शेयर करनेवाले लोगों से यही कहेंगे कि यह टीका केवल उनकी लड़कियों को नहीं लगाया जा रहा बल्कि सभी को लगाया जा रहा है, और अच्छा है कि लगाया जा रहा है। अगर ना लगाया जाए तो उनमें रुबेला यानी (जर्मन) खसरा होने की संभावना बढ़ जाएगी। रुबेला को जर्मन खसरा भी कहा जाता है। WHO के मुताबिक़, हर साल एक लाख से ज़्यादा बच्चे कनजेनिटल रुबेला सिन्ड्रोम (CRS) यानी जन्म से ही ख़सरे के लक्षण के साथ पैदा होते हैं। रुबेला का कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन इसे टीके की मदद से रोका जा सकता है। चूँकि इसका ख़तरा बच्चों और नवयुवकों में ज़्यादा होता है, लिहाज़ा उन्हें यह टीका लगाया जाता है।




पोस्ट में दवा की तस्वीर के साथ दो और तस्वीरें भी थीं जिनमें दो कुछ लड़कियों को ज़मीन पर लेटा दिखाया गया है। हमने दोनों का सच जानने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। हालाँकि एक संभावना है। इस टीके के कुछ साइड इफ़ेक्ट्स हैं, जैसे गले में ख़राश, सिरदर्द, बलगम आना, उल्टी होना, जोड़ों का दर्द आदि। इसलिए हो सकता है कि इन्जेक्शन देने के बाद इन स्टूडेंट्स की तबीयत थोड़ी ख़राब हुई हो।




इतनी जानकारी आपको इसलिए दी है ताकि आप किसी झूठ पर यक़ीन कर अपने बच्चों को यह टीका लगवाने से इनकार ना कर दें। इस टीके से महिलाओं की गर्भधारण क्षमता को कोई ख़तरा नहीं है। टीका नहीं लगवाने से ख़तरा ज़रूर है। क्योंकि ऐसी सूरत में भविष्य में गर्भवती महिला के भ्रूण की मृत्यु हो सकती है या CRS के प्रभाव के चलते बच्चे को जन्मजात दोष हो सकते हैं, जैसे मस्तिष्क क्षति, बहरापन आदि।

लिहाज़ा इस झूठ से बचिए और दूसरों को भी बचाइए।



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