दलित-मुस्लिम गाय को मारे तो बिच चौराह पर सजाए मौत, ब्राम्हण मारे तो सिर्फ गंगा नहाने की

(प्रतीकात्मक फोटो)
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मध्य प्रदेश में ऊंची जाति के एक शख्स ने पिछड़ी जाति के एक शख्स की गाय को मार दिया।

इस जुर्म की सजा उसे क्या दी गई ? सिर्फ गंगा में नहाने की।
अगर यही जुर्म किसी दलित या अल्पसंख्यक द्वारा किया जाता तो इसकी सजा आपको बताने की जरूरत नहीं। क्यूंकि देश में दलितों और मुस्लिमों पर गाय के नाम पर किस तरह की हिंसा की जा रही है, इससे हम सब वाकिफ हैं।
खबर के मुताबिक, ये मामला टीकमगढ़ जिले के दुम्बर गांव हैं। जहाँ मोहन तिवारी ने पिछड़ी जाति के शंकर अहीरवार की गाय को गुस्से में आकर सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि वह उसके खेत में कई बार दाखिल होकर उसे खराब कर चुकी थी।

इस घटना के बाद घटना की ब्राह्मण समाज ने पंचायत की और गाय की हत्या करने के लिए तिवारी को गंगा नहाने, भोज खिलाने की सजा का फरमान जारी कर दिया।
इस मामले में शंकर अहीरवार ने पुलिस में शिकायत की। जिसके बाद तिवारी के खिलाफ मध्य प्रदेश गौ-वध प्रतिबंध कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। (साभार)

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