भड़ास निकाल दिया आज पूरा पढ़ना मजा न आया तो पैसा वापस -फरहीन

व्हाट्स अप ओर फेसबुक अपने क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है, हर आदमी क्रांति करना चाहता है। कोई बेडरूम में लेटे लेटे गौ हत्या करने वालों को सबक सिखाने कि बातें कर रहा है तो किसी के इरादे सोफे पर बैठे बैठे मुसलमानो या हिंदूओं को उखाड फेंकने के हो रहे हैं।

गांव जाने के नाम पर आत्महत्या कि धमकी देने वाले ढक्कन किसानों को ज्ञान पेल रहे हैं। तो कुछ हफ्ते में एक दिन नहाने वाले स्वच्छता अभियान कि खिलाफत और समर्थन कर रहे हैं। . अपने बिस्तर से उठकर एक ग्लास पानी लेने पर नौबेल पुरस्कार कि उम्मीद रखने वाले बता रहे हैं कि मां बाप की सेवा कैसे करनी चाहीये।

जिन्होंने आज तक बचपन में कंचे तक नहीं जीते वह बता रहे हैं कि भारत रत्न किसे मिलना चाहीये। . जिन्हें गल्ली क्रिकेट में इसी शर्त पर खिलाया जाता था कि बॉल कोई भी मारे पर अगर नाली में गयी तो निकालना तुझे ही पडेगा वह आज कोहली को समझाते पाये जायेंगे की उसे कैसे खेलना है। . जो महाशय लडकों को भी बुरी नजर से देखते हैं आज उन्हें नारी सुरक्षा कि चिंता है। देश में महिलाओं की कम जनसंख्या को देखते हुये उन्होनें नकली ID's बना कर जनसंख्या को बराबर कर दिया है।

loading...


जिन्हें यह तक नही पता कि हुमायूं बाबर का क्या था वह आज बता रहे हैं कि किसने कितनों को काटा था। हाथ में चश्मा पकडकर भी पुरे घर में चश्मा ढूंढने वाले अंधे बतायेंगे कि कौन सा नेता कौन सा वादा भुल गया। . जिन्हें यह तक नही याद है कि हमारे राज्य की राजधानी क्या है वह भी बता रहे होते हैं कि सनातन धर्म में पाच हजार साल पहले क्या हुआ था।

कुछ धर्म के ठेकेदार भी हैं जो दिन भर हिंदू मुसलमान होने के सर्टीफिकेट बाटते रहते हैं जैसे कि जब तक उनकी फोटो लाईक नही करेंगे आपको आपके मोहल्ले के लोग हिंदू या मुसलमान ही नही मानेंगे। . कुछ दिन भर शायरीयाँ पेलेंगे जैसे 'गालिब' के असली बाप यही थे। कोई अपनी शायरी में गम दिखा रहा है तो कोई बता रहा है कि वह कितने बड़े तोप है। जो लोग एक चिंटी काट लेने पर रो रो कर पुरे मोहल्ले में हल्ला मचा देते हैं वह प्यार में और देश के लिये सर कटा लेने कि बात करते दिखेंग
-फरहीन नफीस

loading...