EVM हैकिंग के बावजूद ओवेसी को बीजेपी एजंट बताना सिर्फ मुस्लिम द्वेष की निशानी

सोशल डायरी ब्यूरो
बीजेपी को EVM में गड़बड़ी कर बनी हुई सरकार बीजेपी के अलावा सभी राजनैतिक दल और उनके दिग्गज कह रहे है. जिस मुह से यह लोग बीजेपी को EVM से बनी सरकार कह रहे है उसी मुह से ओवेसी को बीजेपी को जितने में हर वक्त जितने में मदत करने वाला बीजेपी का एजंट बताते है. इससे साफ जाहिर है के यह लोग AIMIM के विरोधी है और ना यह बीजेपी के विरोधी है यह तो सिर्फ मुस्लिम द्वेषी, दोगले दलाल है. जो ओवेसी को बीजेपी का एजंट बताते है सिर्फ इसलिए के वह मुस्लिम है. सभी पार्टियों में मुस्लिम लीडर है जो मुख्य पदों पर विराजमान है. जो अपनी अपनी पार्टी की गुलामी करते है. मुसलमानों पर जुल्म करने वाली पार्टी सिर्फ बीजेपी ही नहीं सबसे ज्यादा जुल्म करने वाली तो कांग्रेस है. उसके साथ सभी पार्टियों के शासनकाल में मुसलमानों पर जुल्म हुए है. किसी एक को दोष देना नाइंसाफी होगी. इस दौरान सभी पार्टियों के नेताओं ने अपनी जुबाने सिलवा ली थी. अगर जुबान खोलते तो पद से हटाये जाते, कुर्सी छीन ली जाती इसलिए कोई कुछ नहीं बोला. अगर कोई मुस्लिम नेता उभरता है और लोग उसका नेतृत्व कुबूल करते है तो सभी मुस्लिम नेताओं की दुकानदारी बंद हो जाती. इसलिए ओवेसी का विरोध करना उनके लिए जरुरी हो गया. और अपने आकाओं की दलाली भी करनी है. 


यूपी चुनाव के बाद बीजेपी के अलावा सभी पार्टियों ने EVM पर सवाल उठाते हुए बीजेपी को EVM सरकार बताते हुए EVM पर पाबंदी लगाने की मांग की, याद रहे इनमे वो सभी स्वघोषित मुस्लिम लीडर शामिल है जिन्होंने ओवेसी को बीजेपी का एजंट कहा. जिस मुह से बिना सोचे समझे इन लोगो ने ओवेसी को बीजेपी का एजंट बताया उनको कोई हक़ नहीं बनता के वह ओवेसी को छोड़कर EVM को दोष दे. अगर EVM दोषी है तो फिर ओवेसी कैसे बीजेपी का एजंट हुआ ? अगर ओवेसी बीजेपी के एजंट है तो EVM में गड़बड़ी का सवाल ही नहीं उठता. सभी मुस्लिमो के स्वयंघोषित हितैषी दोगले है. अपनी पथ-प्रतिष्ठा और कुर्सी के लिए मुस्लिम नेता उभरने नहीं देते. और मुसलमानों को गुमराह कर अपनी दलाली की दुकाने धड़ल्ले से चलाते है. मुस्लिमो के अलावा कुछ और भी है जो ओवेसी को बीजेपी का एजंट बताते है. हम उन्हें दोष नहीं देना चाहते क्यूंकि, उनकी आवाज तब बुलंद हुई जब मुस्लिम दलालों की हुई. मुस्लिम दलालों ने मुस्लिम द्वेष में संघ को भी पीछे छोड़ा यह शर्म की बात है. अब सभी पार्टियों को पहले यह तय करना होगा के बीजेपी को जिताने वाला कौन ? ओवेसी या EVM दोनों में से जो निर्दोष है क्या उनसके निर्दोष होने का प्रचार दोगले लोग करेंगे ? दोगले पार्टी के मुखिया कहेंगे ?नहीं..... क्यूंकि यह ओवेसी विरोधी नहीं मुस्लिम द्वेषी है.  संघी है. 


यह देखो ये साहब और ऐसे कई साहब भी है जो ओवेसी पर सवाल उठाते है. अपने रिश्तेदार मायावती, मुलायम, अखिलेश, नितीश, लालू, शरद पवार, आठवले, केजरीवाल अदि सत्ताधारियो पर या कई बार सत्ता संभाल चुके उनसे सवाल नहीं करते एक सांसद से सवाल करते है. 




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