रूबीना शेख डी.एस.पी. तथा वीशा बनी डिप्टी कलेक्टर

कहते हैं टैलेंट छुपाए नहीं छुपता कई बार टैलेंट ऐसी जगह से निकलकर बाहर आता है जिसका गुमान आम आदमी नहीं कर सकता । कुछ ऐसा ही देवास की सर जमी पर भी हुआ । देवास जिसकी पहचान औद्योगिक नगरी एवं संगीत रसिकों के रूप में पूरे हिंदुस्तान में बनी हुई है पिछले 10 दिनों से शहरवासियों का सर फक्र से ऊंचा हो रहा है होना भी चाहिए दो बेटियां जिन्होंने पीएससी 2015 परीक्षा में अपने आप को चयनित करवा कर शहर का नाम गौरवान्वित किया है । दोनों ही बेटियों की कहानी मध्यम वर्गीय परिवार से शुरू होती है ।



रुबीना शेख अत्यंत मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी उनके पिता चूड़ी बाखल में कंगन स्टोर चलाते हैं। परिवार में पिता सलीम शेख माता जेबुन्निसा का शिक्षा का ग्राफ बहुत कम मगर माता पिता एवं गुरु के सानिध्य में अपने आप को निखारती गई।  और 12वीं कक्षा में 94.4 अंक प्राप्त कर शहर का एवं समाज का नाम पूरे प्रदेश में गौरवान्वित किया । 
इसी प्रकार विशा माधवानी भी मध्यम परिवार मै जन्मी एवं पली-बढ़ी शुरू से ही पढ़ाई के प्रति उसका रूझान बहुत अधिक था और उसी मेहनत का फल उसे 2013 और 14 में महिला सशक्तिकरण अधिकारी के पद पर चयनित होकर मिला । 

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शुरू से ही कलेक्टर बनने की चाहत दोनों में कूट कूट कर भरी थी उसी का नतीजा हुआ कि 2015 मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग परीक्षा में दोनों ही बालिकाओं का चयन हुआ वीशा को डिप्टी कलेक्टर का पद मिला रुबीना को डीएसपी पद पर चयनित किया गया । रुबीना खिलचीपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग में परियोजना अधिकारी के पद पर कार्यरत है पद पर रहते हुए उसने कड़ी मेहनत कर यह स्थान हासिल किया ।  रुबीना बताती है कि उसे उसके परिवार के साथ साथ उसके पति अरबाज़ हुसैन एवं जिला अधिकारी प्रफुल्ल खत्री एवम् देवास की जानी-मानी सामाजिक संस्था पथ प्रदर्शक के अध्यक्ष डॉ रईस कुरेशी का अविस्मरणीय साथ एवं सहयोग समय समय पर प्राप्त होता रहा जिसके कारण उसने यह स्थान हासिल किया है ।



कलेक्टर से कम कुछ कुबूल नहीं 
जब हमने विशा एवम् रुबीना से भविष्य के बारे में जानना चाहा तो लगभग दोनों का यही कहना था कि हमें कलेक्टर से कम कुछ भी क़ुबूल नहीं है हम अभी भी इस पद से संतुष्ट नहीं है हम और मेहनत करेंगे ,और मेहनत करेंगे ,और समाज का एवं शहर का नाम रोशन करेंगे ।

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