इमरान_प्रतापगढी भडवागिरी का दुसरा नाम

पिछले कुछ वर्षों से इमरान प्रतापगढ़ी को सुन रहा हूँ कुछ लोग उनको शायर कहते है जबकि एक पढ़ा लिखा इंसान जिसको शायरी की हल्की फुल्की भी समझ हो वो कभी भी उनको शायर नही समझेगा बल्कि एक तुकबन्दी और अच्छे गले से पढ़ने वाला समझकर रिजेक्ट लिस्ट में डाल देगा। दरअसल शायरी का जो फन है वो इशारों और संकेतों के ही द्वारा जनता के सामने पहुंचाया जाता है जिसको दर्शक घर जाकर भी कुछ महीनों तक सोचता रहे। आजकल सुनने वाले भी इतने अच्छे नही है जो शायर को समझ पाए लेकिन इमरान प्रतापगढ़ी एक अच्छा गवैया हो सकता है शायर तो कभी भी नही जो तुकबन्दी से कुछ शब्दों का जाल बुनकर सब कुछ वही बोल देता है जिससे वहां पर मौजूद जनता वाहवाही लुटाने में भी कोई कंजूसी नही बरतती है।


इमरान प्रतापगढ़ी जिस नेता के मंच पर जाता है उसी नेता की तारीफ के ऐसे पुल की तामीर कर देता है जिसको उस वक़्त तो शायद सुनामी की लहरें भी नही खत्म कर सकती है फिर दूसरी बार पहले वाले नेता के विरोधी के मंच पर जाकर ऐसी तारीफ के कसीदे पढ़े जाते है जिससे लगता है घनघोर वर्षा होने ही वाली है और नेता जी अपनी तारीफ सुनकर गद गद नज़र आते है और जनता चक्कर में पढ़ जाती है कि चापलूसी किसकी ज्यादा अच्छी की थी पहले वाले नेता की या फिर विरोधी की, इधर इमरान प्रतापगढ़ी शाइनिंग अमाउंट लेकर रफू चक्कर हो जाते है।


वैसे तो इमरान प्रतापगढ़ी मौके पर ही चौका मारता है और मुशायरों और कवि सम्मेलनों में जाकर मौजूद नौजवानों में भावनात्मक तुकबन्दी करके उनको सम्मोहित कर लेता है जिससे उस वक़्त युवाओं के चंचल ह्रदय में इमरान प्रतापगढ़ी की इमेज एक हीरो की हो जाती है और उसकी टी आर पी भी खूब बड़ती है क़ोम, मिल्लत, देश की बाते कर करके खूब गुमराह करता है आजकल तो देश के बुद्धिजीवी शायरों ने इमरान प्रतापगढ़ी के साथ मुशायरा पढ़ना ही मना कर दिया है। मालूम नही इसमें क्या राज़ है।पिछली सपा सरकार में उनको यश भारती से भी नवाज़ दिया गया है क्योंकि उस सरकार के भी खिलाफ कुछ तुकबन्दी सुनाकर युवाओं के ह्रदय को परिवर्तित किया जा रहा है जो कि सरकार ने वक़्त की नजाकत को समझते हुए सही फैसला लिया या नही उसकी विवेचना होना चाहिए।
लेखक -इम्तियाज अहमद चौधरी, 
सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश