मुसलमान आजाद भारत का शूद्र है ये ऐहलान है, सच्चर कमिटी की रिपोर्ट

यूपी के मुसलमानों को अपील
यूपी में इलेक्शन शुरू हो चुके है। सात मरहलों में इलेक्शन होना है। मुसलमान आजाद भारत में 70 सालों में झूठे वादों के चक्कर में बहोत कुछ गवाँ दिया। सेक्युलॅरिझम के नाम पर आगे भी कुछ पाने की उमीद नहीं है। सच्चर कमिटी के मुताबिक मुसलमानों की हालत ने तमाम सेक्युलर पार्टीयों (खासकर कांग्रेस अ‍ॅन्ड कंपनी) की झूठी हमदर्दी की आड में मक्कारी अया कर दी। आजाद भारत में अजिम शक्सीयत बाबासाहब डा. भीमराव आंबेडकर का दस्तूर नाफिज है। मगर उसपर अमल नहीं होता. बाबासाहब डा. आंबेडकरने कहा था, किसी भी लोकशाही देश का दस्तूर चाहे कितना भी अच्छा हो, उसे नाफिज करनेवाले हुमकरा अगर बेईमान हो तो उसका फायदा वहॉ की अवाँम को नही होगा। सच्चर कमिटी की रिपोर्ट बाबासाहब डा. आंबेडकर के कौल व दूरअनदेशी की गवाही दे रही है क्यों की 70 सालों में कांग्रेस अ‍ॅन्ड कंपनीने सिर्फ दस्तूर पर अमल करने का नाटक किया है। वरना क्या वजह है। अंग्रेजो की गुलामी में मुसलमानों की तालिमी, समाजी व मआशी हालत चार गूना अच्छी थी। देश का ब्राह्मण सनातन धर्म व मनुस्मृती पर ऐतमाद व अमलपर यकीन करता है जीस में ताकद के बलपर नाइंसाफी, गैरबराबरी, गुलामी की तरफदारी व हिमायत की गयी है। आजाद भारत में कांग्रेस अ‍ॅन्ड कंपनीने दस्तूर पर अमल ना कर मनुस्मृतीपर अमल किया है। इसीका नतीजा सच्चर कमिटी की रिपोर्ट है। मनुस्मृती के मुताबिक ब्राह्मण, कायस्थ, ठाकूर, राजपूत, बनिया (ताजिर) ये हुकमरा कोम है । 



शूद्रों का काम इनकी खिदमद करना व इनकी हुकूमत लाने में मदत करना है। बाबासाहब डा. आंबेडकर ने इसी मनुस्मृती की, मुखालेफत की थी जिसका नतिजा उन्हे ब्राह्मणों से जिंदगीभर जद्दोजहेद करनी पडी। जिसका नतिजा उन्होंने शूद्रों को एक हद्दतक हुक्मरा (ब्राह्मण) से आजाद करवाया। आजाद भारत में हुक्मरा (ब्राह्मण) को शूद्रों की जरूरत थी फिर चाणक्य ब्राह्मणने मुसलमानों को शूद्र बनाने का काम शुरू किया। आज वो इसमें कामियाब हो गये। सच्चर कमिटी की रिपोर्ट मुसलमान आजाद भारत का शूद्र है ये ऐहलान है। 
बाबासाहब डा. आंबेडकर को ब्राह्मणोंपर भरोसा नही था इसी वजह से उन्होने जिंदगीभर जद्दोजहेद कर दलितों को लोकशाही देश में तालिम, नौकरी व सियासत में रिझर्व्हेशन हासिल किया। इसीका नतिजा है की, हुकूमत मक्कार सेक्युलर की हो या फिरकापरस्त की दलितों की नुमायंदगी अबादी तनासुब से हर शोअबे में बरकरार रहती है। ब्राह्मणों के ना चहने पर भी दलितों का मीअयार एक हद्दतक उँचा हुआ है। बाबासाहब डा. आंबेडकर भी एक इन्सान थे। उनमें भी कुछ खामियॉ होगी फिर भी दलितों ने उनपर भरोसा किया, उनकी कयादत को कबूल कर इकठ्ठ हुये जिसका नतिजा तालिम नौकरी व सियासत में रिझर्व्हेशन है।

भारत में आज के शूद्र (मुसलमान) को भी जगाने के लिए बाबासाहब डा. आंबेडकर के नक्से कदम पर चलते हुये नकीबे मील्लत बॅरिस्टर असद्दोदीन ओवैसी साहब जद्दोजहद कर रहे है। उन में भी लाख खामिया होगी उसे नजर अंदाज कर हमारी आनेवाली नस्लो के मुस्तकबिल की खातीर असद्दोदीन ओवैसी साहब कयादत में इकठ्ठा होकर मक्कार सेक्युलर व फिरकापरस्तों के मनसुबो को खाक में मिलाना है। 
यूपी में सात मरहलो में इलेक्शन होने जा रहा है। हमने हमेशा मक्कार सेक्युलरोंका साथ दिया। गुजिश्ता पांच साल पहले भी समाजवादी (मक्कार व मौकापरस्त) का साथ दिया। नतिजे में मुजफरनगर, मेरठ, दादरी का इनाम मिला। गुजिस्ताँ असेंब्ली में 66 मुस्लिम एम. एल. ए. थे। उसमें हुकमरा समाजवादी के 35 मुस्लिम एम. एल. ए. थे। मुजफर नगर जल रहा था, मुस्लिम एमएलए पार्टी की नुमायंदगीरी करते रहे। दादरी में अखलाख बीफ का शिकार हुये तब मुस्लिम एमएलये खामोश रहे।



आज एकबार फिर बेईमान कांग्रेस, धोकेबाज अखिलेश ईत्तेहाद (मौकापरस्ती) कर मुसलमानों को बेवकूब बनाने के लिए तैयार है। अब मुसलमानों को रोने की बजाए इन बेईमानों को रूलाने का एक अच्छा मौका आया है। यूपी के मुसलमानों से गुजारिश है की, एक मौका बीएसपी को देकर दलित-मुसलमान इत्तेहाद को कामियाब करें। इन्शाअल्लाह अनेवाली हुकूमत बीएसपी व एमआयएम की होगी। 
खबरदार जहां भी ब्राह्मण, कायस्थ, ठाकूर, राजपूत व बनिया उम्मेदवार हो मुसलमान उन्हे वोट ना दे। चाहे वो बीएसपी पार्टी से हो।