''पतंजलि'' पर 11 लाख का जुर्माना

हरिद्वार। रामदेव शायद अकेले ऐसे बाबा हैं, जो अर्थ (पैसा), धर्म, काम (ताकत की इच्छा) और मोक्ष  पूरे पैकेज के तौर पर मिलते हैं. इसी वजह से वह एक नेता और एक लाला दोनों रूप में काम करते हैं. पर न्यायपालिका के आगे लाला और नेता दोनों ढेर हैं. रामदेव की कंपनी ''पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड'' की पांच यूनिटों पर हरिद्वार की एडीएम कोर्ट ने ‘गलत प्रचार एवं भ्रामक विज्ञापन’ के मामले पर 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. 

पतंजलि का टर्नओवर 5 हजार करोड़ है जिसे अगले वित्तीय वर्ष तक 10 हजार करोड़ रुपए पहुंचाना है. अभी हाल ही में असम में 150 एकड़ की जमीन के अधिग्रहण के मामले में पतंजलि आयुर्वेद विवादों में घिरी थी. असम में पतंजलि हर्बल पार्क और मेगाफूड पार्क की स्थापना करने जा रही है.



कोर्ट ने माना कि ''पतंजलि'' जिन उत्पादों को अपनी यूनिटों में उत्पादित बताकर उनके लेबल पर बेच रही थी, वह किसी दूसरी यूनिटों में बने थे. यह सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम-2006 की धारा 52-53 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (पैकेजिंग एंड लेबलिंग रेग्युलेशन-2011) की धारा 23.1(5) का उल्लंघन है. ''पतंजलि'' को जुर्माने की यह रकम एक महीने के भीतर जमा करानी होगी. साथ ही भविष्य में सुधार न करने पर जिला खाद्य सुरक्षा विभाग को ‘पतंजलि’ पर जरूरी कार्रवाई का भी निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश एक दिसंबर 2016 को दिया था लेकिन यह अब उजागर हुआ है.

खाद्य सुरक्षा विभाग ने कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर से ''पतंजलि'' द्वारा उत्पादित बेसन, शहद, कच्ची घानी का सरसों का तेल, जैम एवं नमक के सैंपल लिए थे, रुद्रपुर लैब में जब इन उत्पादों की जांच हुई तो ये सैंपल फेल हो गए, जिसके बाद कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया.



वर्तमान मामला करीब 4 साल पुराना है. इस मामले से जुड़े नमूने 16 अगस्त 2012 को लिए गए थे. जिला खाद्य सुरक्षा विभाग ने कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर से ''पतंजलि'' द्वारा उत्पादित बेसन, शहद, कच्ची घानी का सरसों का तेल, जैम एवं नमक के सैंपलों को जांच के लिए रुद्रपुर लैब में भेजा था.

रिपोर्ट में उत्पादों के सैंपल फेल हो गए. इसे लेकर जिला खाद्य सुरक्षा विभाग ने एडीएम कोर्ट में वर्ष 2012 में मुकदमा दायर किया था. पिछले चार सालों से कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई चल रही थी. सुनवाई के दौरान ''पतंजलि'' की ओर से भी तथ्य रखे गए, जिन्हें कोर्ट ने अपर्याप्त मानते हुए फैसला सुनाया. (दलित दस्तक से साभार)