लेखको.....! कुरान पर कुछ ऐसी बात प्रस्तुत करो कि करोडों मुसलमान हिल जायें

लेखकों कुरआन पर लिख कर देखो, कुछ ऐसी बात प्रस्तुत करो कि करोडों मुसलमान हिल जायें, आप भी जगप्रसिद्ध हो जाओगे, अब कुरआन पर कलम उठाने में भाषा बाधा नहीं है,75 भाषाओं में इस्लाम पर जानकारियां उपलब्ध हैं, हिन्दी,तमिल,मलयालम और इंग्लिश सहित 40 भाषाओं कुरआन का अनुवाद उपलब्ध है। हिन्दी अनुवाद सहित pdf फाइल को भी डाउनलोड किया जा सकता है, फिर भी हिन्दी में लिखने वाले छानबीन करके कुरआन के बारे में कुछ प्रस्‍तुत नहीं कर पा रहे, सैंकडों साल(लगभग1430) से कुरआन में एक भी ऐसी बात तलाश ना करसके कि जिससे मुसलमान इन्‍कार ना करसकें, सच्चाई से क्यूं मुंह ना छिपाओ, आओ करोडों मुसलमान आपके लेख का इंतजार कर रहे हैं,
‘अगर यह कुरआन अल्लाह के बजाये किसी और की ओर से होता तो वे उसके भीतर बडा विरोधाभास पाते।‘ -सूरःनिसा (कुरआन 4:82 ) 
Do they not ponder about the Qur’an? Had it been from any other than Allah, they would surely have found in it much inconsistency. (Quran: 4:82)
بھلا یہ قرآن میں غور کیوں نہیں کرتے؟ اگر یہ خدا کے سوا کسی اور کا (کلام) ہوتا تو اس میں (بہت سا) اختلاف پاتے (٨٢)


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मीठे और खारे पानी के बिच एक रुकावट होती है.
मतलब ये दो तरहा के पानी है जो जो आपस में मिलते तो है लेकिन घुलते नहीं .
ये खोज अभी कुछ सालों पहेले लगाई गई.
और ये बात चौंका देने वाली है के पानी आपस में मिलता तो है लेकिन घुलता नहीं 
"जहां दो अलग अलग समुन्दर मिलते है वहाँ एक रुकावट होती है जो एक दूसरे से मिलाती है लेकिन पानी घुलता नहीं,उनके बिच एक (परदा)दीवार होती है .............
जैसे अटलांटिक महासागर + रोम सागर और उसी तरहा Cape Point+Cape Peninsula और अटलांटिक महासागर+हिंदी महासागर 
(सन्दर्भ:- Principles of Oceanography Devis page 92-93)

जिसने समुन्दर बनाया वो बखूबी जानता था उसी अल्लाह ने कुरान में 1400 साल पहेले ये बात कही थी
***दो समुन्दरों को उसने(आल्लाह)ने छोड़ दिया के वे एक दूसरे से मिल जाए,फिर भी उनके बिच एक दीवार है जो एक दूसरे को घुलने नहीं देती ......
(कुरान:-सुराह-55 आयात-19और20)