तलाक..! तलाक..!! तलाक ..!!!

तिन तलाक का मुद्दा सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है.
किसी-न-किसी बड़ी घटना को स्कार्फ पहनाने की साजिश है. और सभी इस विषय को लेकर बहस में व्यस्त है. देखिये सोशल मीडिया पर किसने क्या कहा.....


Firdaus Siddiqui
Talaaq Talaaq Talaaq 
is muddey pr mai kuchh nahi bol sakti pr itna kahungi k
shukr hai khuda ka talaaq dene ki Authority mardon ke haath hai agar aurton ke haath hota talaaq dena to aaaye din talaaq diya kartin.
takhliq hi aisi hai jhalli jaisi , har baat pr jaldbazi aur baad me pachhtana !


Md Shafi Farouqui
तलाक़ का छोडो।
ये बताओ वेश्या व्यवसाय में फंसी
महिलाओं के इंसाफ के लिये कब आवाज़ उठा रहे हो और कब अदलत का दरवाज़ा खटखटा रहे हो???????


Farheen Nafees
तस्लीमा नसरीन,सलमान रुश्दी,तारिक़ फ़तेह या जावेद अख्तर साहब या अन्य कोई इनसे मेरी कोई लड़ाई नही और न ही मेने इनके लिये कभी कोई आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल की,और ये सब लोग नास्तिक है अपनी पसंद है इन सब की है मेरा ऐतराज़ सिर्फ इतना है कि धर्म पर राय रखने के लिये "नास्तिक" क्यों , हाँ बोलना चाहये तर्क रखना चाहये, लेकिन तब जब बहस धार्मिकता या नास्तिकता की हो लेकिन जब बहस किसी धार्मिक मसलें,धार्मिल कुरीति या धर्म के नाम की कुरीति को हो तो इन लोगों का बीच में कूद पड़ना आखिर क्यों? और खास कर इस्लाम के मसले में यानी मिडिया या अन्य जगह बहस में धर्म की बात करने के लिए हां आलोचना(तार्किक) करिये वो सही है,लेकिन धर्म के मसले पर की सही या गलत कहना या बिना बात के किसी एक धर्म पर बिना बात की टिप्पणियां कराने के लिए तंजिया भाषा का इस्तेमाल कराना कितना उचित है बताइये, ये पूर्णत अनुचित है,गलत है और एक सभ्य बहस की शैली को कमज़ोर करना है... तभी में कह देता हूँ की "बताइये ये इस्लाम पर राय रखेंगे कोई देखेगा तो क्या कहेगा"... बाकि इस्लाम तार्किक बात की पूरी इजाज़त देता है करिये....लेकिन एक तरीक़े से सलीक़े से...
#वंदे_ईश्वरम
Asad Shaikh ki kalam se


Santosh Yadav
एक-दो-तीन तलाक का तो ठीक है, पर जो बिना तलाक दिए ही भाग निकला हो, उस पर कौन-सा कानून लगेगा...मुझे लगता है कि सबसे पहले इस ज़ीरो तलाक का समाधान करना चाहिए-

Mohammad Anas
निकाह से लेकर तलाक़ तक सबकुछ आरएसएस ही बताएगी तो फिर आरएसएस जामताड़ा के मिनहाज अंसारी जिसे वाट्सएप पर मरी हुई गाय पर टिप्पणी करने के बाद पुलिस हिरासत में पीट पीट कर हत्या कर दिया गया उसपे कुछ क्यों नहीं बताती? बताए की न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए सिर्फ बताए ही क्यों, न्याय सुनिश्चित कराए क्योंकि उससे बड़ी ताकत वर्तमान में किसी के पास नहीं।

मोदी सरकार अपने मंत्री को अख़लाक के हत्यारे के मरने पर श्रद्धासुमन अर्पित कराने क्यों भेजती है?क्यों प्रधानमंत्री लखनऊ आने पर जय श्री राम, जय जय श्रीराम चिल्लाते हैं। क्या प्रधानमंत्री इस तरह से समान नागरिक संहिता देश में लागू करवाएंगे?

समान नागरिक संहिता सिर्फ तलाक तक क्यों सीमित रहे?  हर स्तर पर समान व्यवहार लागू हो। अकेले तलाक ही क्यों?  सच्चर समिति की रिपोर्ट लागू हो जाए तो मुसलमानों के हालात बेहतर वैसे ही जाएंगे। तीन तलाक का सख्त विरोधी हमेशा से था पर आज जैसे हालात बना दिए गए हैं मुल्क के उन परिस्थितियों में  मुसलमानों के नियम कानून से छेड़छाड़ सिर्फ उनकी पहचान खत्म करने की साज़िश भर है उससे अधिक कुछ नहीं।

जिस संगठन के इशारों पर केंद्र सरकार चल रही है  उस संगठन का महिलाओं के प्रति कैसा नज़रिया है यह किसी से छुपा नहीं है। वह मुस्लिम महिलाओं के हित में  कदम उठाएगी यह सबसे बड़ी भूल है।


Abdul H Khan
#ट्रिपल_तलाक़ के आड़ में #UniformCivilCode रूपी घूँघट ओढ़ कर #युपी_चुनाव को किस और ले जाना चाहती है संघी सरकार?

Tanweer Ahmed Shaikh
अपनी माँ, बहन, बेटीयों को लिविंग रिलेशनशिप में रखने का कानूनी अधिकार #संघियों को मुबारक हो ! हमारी बहनें एवं बेटियाँ #शरीअत में सुरक्षित हैं !


Imran PS
जो जाहिल रोज़ दारू पीकर अपनी औरतो को कुत्ते की तरह मारते है 
वो भी तीन तलाक को गलत ठहरा रहे है ।।

Imtiyaz Khan
दरगाह आला हज़रत के प्रवक्ता मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने कहा है कि मुसलमान किसी हाल में शर्रियत के साथ कोई समझौता नही करेगा और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के मुस्लिम कानून विरोधी हलफनामे का हर स्तर पर विरोध किया जायेगा

Santosh Yadav
लगता है सुब्रह्मन्यण स्वामी को अपनी बेटी सुहानी हैदर की चिंता कुछ ज्यादा है।

भयानक सच: 10 रुपयों में होता है बच्चियों के जिस्म का सौदा