मिल गया दज्जाल का ठिकाना ?



1441 वर्ष पहले पैगम्बर मुहम्मद साहब (स.) इन्होने फरमाया था की, क़यामत से पहले धरती पर दज्जाल का आगमन होगा और वह खुदको रब घोषित करेगा. और वह अपने एक हाथ में जन्नत और एक हाथ में जहांनुम बताएगा. जो लोग कमजोर ईमान वाले है वह इस दज्जाल की पैरवी करेंगे और उसको खुदा मान लेंगे. इसके बाद हजरत इसा अलैहिस्सलाम आयेंगे उसके बाद क़यामत आएगी. इसके साथ हजरत मुहम्मद पैगम्बर (स.) ने यह भी कहा था की दज्जाल कही और से नहीं बल्कि धरती (पृथ्वी) से ही आयेगा और वह ऐसी जगह होगी जहां ना कोई कभी जा सकेगा ना वहांसे कोई वापस आ सकेगा सिवाए दज्जाल के यह जगह किसी भी जीवित से अदृश्य त्रिकोणी (ट्रेंगल) होगी.  जब पृथ्वी पर ऐसी जगह ढूंडने का सोचा जाए तो वह बस एक ही है बरमुडा और वह ट्रेंगल ही है. लेकिन लेकिन यह नहीं कहा जा सकता की हजरत मुहम्मद पैगम्बर (स.) ने बताई हुई यही जगह हो सकती है. लेकिन अबतक की इंसानी पहुँच में आई हुई यह एक ही जगह है. यह महज एक अंदाज है ना कोई अफवाह ना कोई ठोस ना कोई गुमराह करने वाली बात. गैब का इल्म जानने वाल एक ही रब है.
आईये देखते है हाल ही में क्या खुलासा हुआ इस जगह के बारे में.....

जब भी किसी रहस्यमयी जगह की बात होती है, तो बरमुडा का ज़िक्र होना लाज़िमी है। ये दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य माना जाता है जिसे आज तक कोई भी सुलझा नहीं पाया है। न जाने कितने ही शिप और एयर प्लेन्स को ये दैत्य रूपी सागर अपने आप में समां चुका है।
 दैत्य रूपी हमने इसलिए कहा क्योंकि एक बार जो इसकी सीमा में प्रवेश कर जाता है, वो कभी लौट कर नहीं आता, लेकिन हाल ही में हुई घटना ने सबको हिला कर रख दिया, वो हो गया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। एक जहाज़ 90 साल बाद इस रहस्यमयी ट्रायएंगल से लौट आया। …आइए बताते हैं इस अनहोनी के बार में, लेकिन उससे पहले जानते हैं बरमुडा के बारे में



बरमुडा ट्रायएंगल
मान्यताओं के अनुसार यह एक ऐसा रहस्यमय क्षेत्र है जहां पर वायुयान और जलयान रहस्यमयी रूप से लापता होते हैं। 1964 में एक पत्रिका ने इस क्षेत्र को ‘बरमूडा त्रिभुज’ नाम दिया था, तब से इस क्षेत्र पर सनसनीखेज़ समाचारों/कहानियों के लेखकों की कलम चलती ही आ रही है।

विमान और जहाज़ गायब होते रहते हैं

यह बरमुडा त्रिभुज , जिसे ‘शैतान के त्रिभुज’ के रूप में भी जाना जाता है , उत्तर पश्चिम अटलांटिक महासागर का एक क्षेत्र है जिसमें कुछ विमान और सतही जहाज़ (surface vessels) गायब होते रहते हैं। कुछ लोगों का दावा है कि ये गायब होने की बातें ‘मानव त्रुटि (human error)’ या ‘प्रकृति के कृत्यों (acts of nature)’ की सीमाओं के परे हैं। कुछ लोग इसे असामान्य (paranormal) की गतिविधियों से सम्बद्ध बताते हैं।



हवाना में मिला ये जहाज़

क्यूबा के कोस्ट गार्ड ने ये बताया है कि उन्हें एक पानी का जहाज़ मिला है, लेकिन वो लावारिस था। इसे ‘SS Cotopaxi’ माना जा रहा है। यह 1925 से बरमुडा ट्रायएंगल से लापता था। लेकिन हाल में ये फिर से मिल गया है।
हवाना में मिला ये जहाज़
क्यूबन ओथेरिटी ने इसे हवाना में 16 मई को मिलिट्री ज़ोन में पाया। उन्होंने कई बार इसके क्रू मेम्बर से सम्पर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन पाई …अब भला बात तो तब हो न जब कोई हो इस पर। फिर क्या, तीन पैट्रोलिंग बोट्स भेजी और इसकी जानकारी ली गई।


90 साल बाद लौट आया जहाज़

जब वो लोग इस शिप पर पहुंचे तो वो देखकर हैरान हो गए कि ये लगभग 100 साल पुरानी शिप है, जिसका नाम कोटोपेक्सी है, ये वो नाम है जो बरमुडा में गुम हो चुके जहाजों की सीरीज़ में शामिल था। इस जहाज़ पर कोई नहीं मिला। ये जहाज़ 1925 में लापता हो गया था। इसमें कुछ मिला तो वो थी कैप्टन की लॉग-बुक जिससे पता चला कि ये Clinchfield Navigation Company का जहाज़ था। इस जहाज़ के ओनर से भी बात की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका कि आखिर 90 साल पहले हुआ क्या था।

क्यूबा के एक्सपर्ट Rodolfo Salvador Cruz ने कहा है कि ये लॉग-बुक ऑथेंटिक है। इस बुक में जहाज़ की सारी कहानी है, लेकिन 1 दिसम्बर 1925 को अचानक इसकी कहानी रूक जाती है।

32 क्रू मेम्बर लापता

29 नवम्बर 1925 को SS Cotopaxi साऊथ कोरोलीना से हवाना, क्यूबा के लिए रवाना हुआ। इस जहाज़ में 32 क्रु मेम्बर थे, जिनके कमाण्डर थे W.j. Meyer। इस जहाज़ में 2340 टन कोयला ले जाया जा रहा था। यात्रा शुरू करने के 2 दिन बाद ही ये लापता हो गया और 90 साल तक लापता था।

काउंसिल ऑफ मिनिस्ट्री के वाइस प्रेसिडेंट Abelardo Colomé ने कहा है कि इसकी जांच की जा रही है और पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस जहाज़ के गायब होने और फिर मिल जाने के पीछे क्या रहस्य है।

लगता है अब बरमुडा ट्रायएंगल के रहस्य के खुलने का वक्त आ गया है…. देखते हैं क्या होता है (firkee.in/ से साभार )