और वह अपने पिता की लाश को कंधे पर लिए रवाना हुआ............

हमीरपुर। देश के भ्रष्ट सरकारी तंत्र के सामने कोई व्यक्ति इतना लाचार हो जाता है कि उसे अपनों की लाश को कंधे पर ढोना पड़ता है। फिर चाहे वह उडीसा का आदिवासी दाना मांझी हो या उत्तर प्रदेश का राजू। प्रदेश की अखिलेश सरकार यूपी में बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं के चाहे जितने दावे करे लेकिन ऐसी घटनायें इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। रविवार को हमीरपुर में भी ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आयी।
जिसमें एक बेटा अस्पताल में भर्ती पिता की मौत के बाद उनके शव को कंधे पर लादकर घर ले गया। क्योंकि तमाम जतन के बाद भी उसे एम्बुलेंस नहीं मिल सकी। बताते चलें कि भमई गांव निवासी राजू के पिता शिवाधार (90) की बीते रविवार को हालत बिगड़ गई। जिसके बाद बेटा राजू पिता को सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल लेकर गया। तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई।



इसके बाद एंबुलेंस स्टाफ ने एंबुलेंस लाकर जिला अस्पताल में खड़ी कर दी। रविवार सुबह हुई इस घटना के दो घंटे तक राजू अस्पताल में पिता के शव को वापस गांव ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग करता रहा लेकिन एम्बुलेंस ड्राइवर ने जाने से मना कर दिया। जब कहीं से उसकी मदद न हो सकी तो निराश राजू ने पिता के शव को कंधे पर लादकर अस्पताल से गाँव की ओर चल पड़ा। पिता की लाश को कंधे पर लादकर ले जाते कुछ लोगों चन्दा करके शव को भंमई गाँव तक पहुँचाने का बंदोबस्त किया।



इस बारे में एडीएम डॉक्टर आरके प्रजापति ने कहा कि मामले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जायगी। राजू ने बताया की वह गांव में मजदूरी करता है। पिता की बीमारी के बाद जेब में सिर्फ छह सौ रुपये लेकर अस्पताल आया था। जहाँ पिता के इलाज और एम्बुलेंस में ही सारे पैसे खर्च हो गए। उसके पास फूटी कौड़ी भी नही थी। जिससे पिता के शव को ले जाने के लिए वो प्राइवेट वाहन का बंदोबस्त तक नही कर पाया।



(पत्रिका से)