मौर्य का मांझी ना हो जाए, बचे है दो रास्ते एक एमआईएम, दुसरा बीएमपी

बीएसपी छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य को दर-दर भटकना पड़ रहा है। पहले खबर थी कि मौर्य समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे। सीएम अखिलेश ने इशारा भी किया था। लेकिन मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी गुंडों की पार्टी है। वहीं समाजवादी पार्टी में एक धरा उनका जमकर विरोध कर रहा था। शिवपाल यादव ने उन्हें मानसिक संतुलन खो चुका नेता कह दिया है।

बीजेपी में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ केशव प्रसाद मौर्य !
स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी में शामिल होने की जोर शोर से बात सुनी जा रही थी। लेकिन बीजेपी ने पहले ही सांसद केशव प्रसाद मौर्य को अपना प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है। ऐसे में एक म्यान में दो तलवार खतरनाक ना हो जाए। इसलिए बीजेपी भी हिचक रही है। सूत्रों की माने तो बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी में लाने के खिलाफ हैं।

शायद कांग्रेस में बन जाए बात !
स्वामी प्रसाद मौर्य कांग्रेस में जाना भी चाहते हैं और नहीं भी जाना चाहते हैं। क्योंकि यूपी में कांग्रेस की हैसियत बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में अब स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने कुआं और खाई वाली कहावत सामने आ गई है। बीएसपी छोड़ दिया। समाजवादी पार्टी लेगी नहीं। बीजेपी में पहले से एक मौर्य मौजूद हैं। ऐसे में अब कांग्रेस का ही सहारा है। लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए कौन जानता है ?
मौर्य के पास है दो रास्ते.
मौर्य का मांझी न हो जाए ऐसे में मौर्य के पास बचे दो रास्ते एक तो फिलहाल यूपी में बहुचर्चित असदुद्दीन ओवेसी की एमआईएम, या दुसरा विकल्प बहुजन मिक्ति पार्टी. हाल ही में भूतपूर्व कैबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद रत्तू ने बहुजन मुक्ति पार्टी में प्रवेश कर बसपा के कई राजो का खुलासा किया और वह यूपी में चर्चा का विषय बने हुए है. पहला विकल्प अगर मौर्य की विचारधार वही है बदली नहीं है. जय भीम-जय मीम का नारा लगाने वाले एमआईएम में प्रवेश के चांसेस ज्यादा दिखाई दे रहे है. असदुद्दीन ओवेसी की पार्टी को फिलहाल मनुवादी लोग मुसलमानों की पार्टी घोषित करने पर तुले है. हालांकि ऐसा नहीं है. मनुवादि सिर्फ उर्दू नाम होने से ऐसा प्रचार कर रहे है. लेकिन असदुद्दीन ओवेसी उन विचारों के नहीं है. उनकी पार्टी का महत्वपूर्ण नारा है. जय भीम- जय मीम... जय भीम के चलते मौर्य एमआईएम में जाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.