क्या डायरेक्ट हवन से मुसलमानों का खात्मा मुमकिन नहीं. हवन द्वारा ट्रम्प को जिताने की नाकाम कोशिस.

क्या डायरेक्ट हवन से मुसलमानों का खात्मा मुमकिन नहीं. हवन द्वारा ट्रम्प को जिताने की नाकाम कोशिस.
पहले हवन करना, ट्रंप को जिताना फिर ट्रंप द्वारा मुसलमानों का खात्मा बहुत लम्बी प्रोसीजर है ना ? क्यों ना  मुसलमानों से निपटने के लिए डायरेक्ट हवन करे ?

दो दिनों से सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है, के मुसलमानों के खात्मे के लिए ट्रंप को हवं द्वारा जिताने की कोशिस की जा रही है. इस खबर पर लोग अजीब अजीब कमेंट कर रहे है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह है की, क्या डायरेक्ट हवं से मुसलमानों का खात्मा नहीं हो सकता ? जो ट्रंप को जिताने के लिए हवं क्या जा रहा है ? तब इसका जवाब यही होगा के ऐसा कुछ कर्मकांड करने से कुछ नहीं होता यह तो बस एक प्लान है मुसलमानों के खिलाफ गैरमुस्लिम लोगो को खडा करने का. अगर ऐसे हवन कर्मकांड से कुछ ओता तो सबसे पहले भारत की सभी समस्याए ख़त्म होती, बिना प्रचार और प्रसार के बीजेपी सत्ता में होती, दिल्ली की सत्ता गंवानी नहीं पड़ती, अब यूपी की भी गंवानी पड़ेगी.

साथियो इस तरह की खबरे महज भाईचारे को ख़त्म करने और भेद निर्माण करने के लिए फैलाई जाती वही. और जिसके खिलाफ यह खबरे फैलाई जाती है वही लोग इसका प्रचार और प्रसार भी करते है. इसका मतलब वही हुआ ना " अपने हाथो से पैर पर कुल्हाड़ी मारना " और एक खबर वायरल हो रही है वह यह है की, जल्द ही मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा जिसके लिए 50-60 हजार बलिदानी तैयार हो चुके है. मेरा मानना है की, बेचारों का बली क्यों दिया जाए ? अगर हवन करने से सब समस्या का समाधान होता है तो फिर इंसानों की बली किसलिए ?

पिछले दिनों तृप्ति देसाए ने आंदोलन चलाया के महिलाओं को हाजीअली दरगाह पर प्रवेश दिया जाए और वही तृप्ति देसाई का कहना है की, मंदीर और दरगाह महिलाओं ए शोषण के अड्डे अहि. इसका मतलब साफ़ हुआ के मुस्लिम महिला शोषण से बची हुई है अब उनको भी शोषित बनाना चाहती है. और भारत में सिर्फ मुस्लिम महिलाए ही है जो दरगाह में होने वाले कर्मकाण्डो से मुक्त है. लेकिन तृप्ति जैसे लोग आज भी यह कोशिस कर रहे है की, मुस्लिम महिलाए भी कर्मकांड में फंसी रहे.  और इस्लाम तो कर्मकाण्डो के लिए मना करता है. कुछ लोग है जो हर धर्म में है जिनकी मनुवादी मानसिकता है. हमको मनुवादी मानसिकता का प्रचार और प्रसार नहीं करना च्चाहिये.
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उपरोक्त खबर इस तरह से है.

हिंदू सेना ने ट्रंप की जीत के लिए किया हवन, कहा-मुस्‍ल‍िमों से निपटने की एकमात्र आशा की किरण
हिंदू सेना के कार्यताओं को भरोसा है कि ट्रंप ही वो शख्‍स हैं, जो 'मानवता को इस्‍लाम और इस्‍लामिक आतंकवाद' से बचा सकते हैं।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्‍ल‍िकन संभावित डोनल्‍ड ट्रंप की तस्‍वीर के सामने अगरबत्‍त‍ियां और घी का हवन। तस्‍वीर में ट्रंप के माथे पर तिलक। उनकी जीत के लिए प्रार्थनाएं। ट्रंप ने शायद ही हिंदू सेना का नाम सुना हो। इसके बावजूद, इस दक्षिणपंथी संगठन के कार्यकर्ताओं ने उनकी जीत के लिए हवन कार्यक्रम का आयोजन किया। हिंदू सेना के कार्यताओं को भरोसा है कि ट्रंप ही वो शख्‍स हैं, जो ‘मानवता को इस्‍लाम और इस्‍लामिक आतंकवाद’ से बचा सकते हैं।

ट्रंप को अपना ‘हीरो’ बताते हुए हिंदू सेना के प्रमुख विष्‍णु गुप्‍ता ने कहा, ‘हमारा मानना है कि इस्‍लाम और इस्‍लामिक आतंकवाद इस दुनिया के लिए कैंसर हैं। इसकी वजह से भारत को काफी तकलीफ झेलनी पड़ी है। मिस्‍टर ट्रंप भी इस बात में यकीन करते हैं और इसलिए हम उनकी जीत की कामना कर रहे हैं।’ ट्रंप को अपना ‘समर्थन’ जाहिर करने के लिए करीब एक दर्जन हिंदू सेना के कार्यकर्ता जंतर मंतर पर इकट्ठे हुए। उनके साथ एक पंडित और ट्रंप के पोस्‍टर थे। हवन दोपहर 12 बजकर तीस मिनट पर शुरू हुआ और करीब एक घंटे तक चला। इस दौरान हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने उनकी जीत की कामना की।
जब यह पूछा गया कि हिंदू सेना इस्‍लाम का विरोध क्‍यों करती है, गुप्‍ता ने कहा, ‘आईएसआईएस और जैश ए मोहम्‍मद ज्‍वाइन करने वाले लोग कौन हैं? वे हिंदू या ईसाई नहीं हैं। वे सब मुस्‍ल‍िम हैं और ट्रंप उनसे निपटना चाहते हैं।’ गुप्‍ता के मुताबिक, ट्रंप को अपना समर्थन जाहिर करने के लिए हिंदू सेना ने कई अन्‍य कार्यक्रम करने की योजना बनाई है। उन्‍हें इस बात का पूरा भरोसा है कि ट्रंप ही जीतेंगे। गुप्‍ता ने कहा, ‘अगर अमेरिका के लोग ट्रंप से रजामंद नहीं होते तो आखिर कैसे वे लगातार जीत रहे होते।’

हिंदू सेना ने कहा कि वे ट्रंप की विरोधी डेमोक्रेटिक कैंडिडेट बनने की दौड़ में सबसे आगे हिलेरी क्‍ल‍िंटन को समर्थन नहीं देगी क्‍योंकि उनके पास ‘मुसलमानों से निपटने’ का प्‍लान नहीं है। हिंदू सेना के एक सदस्‍य ने कहा, ‘वे सेक्‍युलेरिज्‍म की बात करती हैं। उन्‍होंने मुस्‍ल‍िमों से निपटने के बारे में कुछ भी नहीं कहा। सिर्फ ट्रंप के पास इसे लेकर प्‍लान है।’ गुप्‍ता की योजना है कि वे पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस बात की दरख्‍वास्‍त करेंगे कि वे अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को ट्रंप के समर्थन के लिए अपील करें। हालांकि, गुप्‍ता ने यह भी कहा कि मोदी ने उन्‍हें उस वक्‍त निराश किया, जब उन्‍होंने पहले वर्ल्‍ड सूफी फोरम में इस्‍लाम को शांति का मजहब बताया। गुप्‍ता ने कहा, ”ऐसे में एक ही आशा की किरण है।”
बता दें कि गुप्‍ता वहीं शख्‍स हैं, जिन्‍हें पाकिस्‍तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के दफ्तर में तोड़फोड़ और केरल हाउस की कैंटीन में बीफ परोसे जाने के कथित झूठी शिकायत के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
खबर, जनसत्ता डॉट कॉम से साभार