फिरभी मुसलमान ही दुश्मन ? है ना कमाल ?

लाखो बौद्ध भिक्खुओ का क़त्ल मुसलमानों ने नहीं किया, फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?
60 लाख यहूदियों का क़त्ल हिटलर ने कियी, फिरभी मुसलमान ही दुश्मन ?

दो तीन बार पृथ्वी को निरक्षत्रिय यानी क्षत्रियो को पृथ्वी से नष्ट किया गया था. लेकिन मुसलमानों ने नहीं किया था. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

वर्ण व्यवस्था निर्माण कर इंसानों को चार वर्णों में मुसलमानों ने नहीं बांटा था. इंसानों को अछूत मुसलमानों ने नहीं बनाया. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

महिलाओं से सभी अधिकार छीने गए. महिलाओं को जानवरों और गवारो की लाइन में मुसलमानों ने नहीं बैठाया. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

शुद्र और अतिशूद्र इंसानों से शिक्षा का अधिकार छीन लिया गया. जब वह शिक्षा हासिल करने की गलती करते तो उनकी जुबाने मुसलमानों ने नहीं काटी, उनकी आँखों में गर्म लोहे की सरिया मुसलमानों ने नहीं डाली, उनके कानो में मुसलमानों ने शीश नहीं डाला. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

राजा बली की हात्या की गयी, राजा बृहदरत की ह्त्या की गयी, यह हत्याए मुसलमानों ने नहीं की, फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

नालंदा विश्वविद्यालय को ख़त्म करने के लिए मुसलमानों ने किसीको नेवता नहीं दिया. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

छत्रपति शिवाजी महाराज को राजा बनने से मुसलमानों ने नहीं रोका, छत्रपति शिवाजी महाराज का क़त्ल करने की कोशिस मुसलमानों ने नहीं की, महाराज को अपने पैर के अंगूठे से तिलक मुसलमानों ने नहीं लगाया, गौरतलब है की, औरंगजेब (रह) ने छत्रपति शिवाजी महाराज के हख में दुआ की थी. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

अफजल खान की जीत हो और शिवाजी महाराज की हार हो इसलिए पूना के वाई में कोटिचंडी यज्ञ मुसलमानों ने नहीं किया था. इस्लाम के अनुसार अफजल खान मुसलमान ही नहीं था. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?
छत्रपति शिवाजी महाराज की फ़ौज में 38% मुसलमान थे, उनके पास 700 पठानों की फ़ौज थी. और यह सभी आखिर्तक महाराज के इमानदार फौजी साबित हुए. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

संभाजी महाराज ने मनुस्मृति के विरोध में जाकर हाथियार उठाया था. और अपने 14 वाढ की आयु में कई किताबे लिखी थी. मनुस्मृति के कानून तोड़ने के बदले उनको मनुस्मृति के कानून के अनुसार सजा दि गयी, और महान राजा संभाजी महाराज का क़त्ल मुसलमानों ने नहीं किया. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

राष्ट्रपिता जोतीराव फुले को समाज को सुशिक्षित करने के लीये मुसलमानों ने नहीं रोका, सावित्रिमाई फुले इनके बदन पर मुसलमान गन्दगी नहीं डालते थे, और मुसलमानों ने स्कुलो के लिए जगह देने से इनकार भी नहीं किया. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

जातीय भेदभाव, उच्च नीचता, नफरत मुसलमानों ने नहीं बनाई फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

डॉ बाबासाहब आंबेडकर को जगह जगह विरोध हुआ, उनके हर काम में बाधाये निर्माण की गयी, उनको किसी भी परेशानी में मुसलमानों ने नहीं धकेला. फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

नेताजी सुभाष चनर बोस की हात्या, इंदिरा गांधी की हात्या, मोहनदास गांधी की हात्या, राजिव गांधी की हात्या, संजीव गांधी की हात्या, इन लीडरो की हात्याये मुसलमानों ने नहीं की, फिर भी मुसलमान ही दुश्मन?

और हकीकत में जमीनी लेवल पर मुसलमान किसीका दुश्मन नहीं है. लेकिन इस्लाम के कारण मनुस्मृति ख़त्म हो गयी. समता, स्वतंत्रता, बंधुता कायम हुई. न्याय प्रस्थापित हुआ. और वर्ण व्यवस्था ख़त्म हुई. इसीलिए वर्णव्यवस्था प्रथापित करने वाले मुट्ठीभर लोग मुसलमानों के खिलाफ जहर घोल रहे है. बस यही वजह है हर जगह मुसलमानों को दुश्मन बताया जा रहा है. मुसलमानों ने गैरमुस्लिमो के साथ किसी भी तरह का व्यवहार नहीं किया फिर भी मुसलमान ही दुश्मन? है ना कमाल.......!
और बहुत कुछ है....... लेकिन उतना लिखना मुमकिन नहीं.......