मैं प्रगतशील महिला, मुझे किसी भूमाता ब्रिगेड की जरुरत नहीं _ नाज शेख

मेँ एक प्रगतिशील मुस्लिम महिला हूँ,मतलब में कट्टर नहीं हूँ  "लेकिन" मुझे मेरे राइट्स लेने के लिए किसी ‪`भूमाता_ब्रिगेड`‬ या ‪`‎तृप्ति_देसाई‬` की जरूरत नहीं, मूझे मेरे सारे जरूरी राइट्स बगैर किसी आंदोलन के मेरे मजहब ने 1400 से भी जयादा साल पहले ही दे दिए थे।

जैसे की मेरी तालीम हासिल करने के हक़,
मेरे अपनी पसन्द से शादी करने के हक़,
अपने हिस्से की सम्पत्ति मिलने का हक़,
आपने पति के साथ असहनीय परिस्थितियों में उसे छोड़ने के लिए खुला लेने का हक़,
पति की मौत के बाद दूसरी शादी का हक़
एक ही अल्लाह को एक ही तरह बराबरी से पूजने का हक़.
सब गिनने लगे तो पोस्ट बहुत लंबी हो जायेगी,
तृप्ति देसाई जायदा बेहतर होगा की आप अपनी ब्रिगेड के साथ उन लोगो को हक़ दिलवाये जिन्हें इसकी सख्त जरूरत है, जहा औरतो को तो छोड़िये, दलित मर्दों और बच्चों तक को स्वर्णो के कुवें पर नहीं जाने दिया जाता।

उन्हें हक़ दिलवाइए जहा दलित औरतो को किसी भी वजह से सारे गाँव में नंगा करके या मुह काला करके घुमाया जाता है। दक्षिण भारत की देवदासियों को मुक्ति दिलवाइए,
वृन्दावन में रह रही हजारो विधवाओ को उनकी सही जगह दिलवाइए।
आप के धर्म के अनुसार देवता मेनका और रंभा जेसी अप्सराओ को अपने दरबार की शोभा बनाकर रखते थे लेकिन हमारे धर्म अनुसार मर्द और औरतों में हमेशा निश्चित दूरी बना कर रखने का आदेश दिया भी गया है. और माना भी गया है जिस का पालन करना है हम पर लाज़िमी है "हाजी अली " एक पुरुष संत थे जिनकी मजार पर जाना औरतो के लिए अनुचित हैं। वेसे भी मजार पर जाने न जाने को लेकर मुसलमानो की अपनी अलग अलग राय है , ये मुसलमानो का अपना मामला हैं आप क्यों परेशां होती है ? आप के अपने धर्म में बड़े मामले है सुलझाने के, उनमे अपनी ताकत झोकिये!


हालॉकि की ये मामला पूरी तरह से महिला हित का न होते हुए दबे छुपे तोर पोलिटिकल हैं क्यों की ये सीधे तौर पर इस्लामिक मान्यताओ पर प्रहार है जिस के जरिये हिन्दू धर्म के लचीलेपन और मुस्लिम धर्म के कट्टर पन को हाई लाइट करके लास्ट में हिन्दू और मुसलमान को इसी बेस पर डिवाइड एंड रूल का फंडा अपनाना ही एजेंडा है, क्यों "शनि शिगनापुर" में आखिर कर पूजा की अनुमति दे ही दी, पर यहाँ ऐसा नहीं होगा। और अंततः यही साबित करने की कोशिस की मुस्लिम कट्टर है, महिला विरोधी है, यही रणनीति है जिसे बड़ी चतुराई के साथ एक के बाद एक कार्यन्वित किया जा रहा है, कभी,तीन तलाक़ तो कभी दरगाह में प्रवेश और भी न जाने कितने मुद्दे ढूंढ लिए जायेंगे।


"वर्ण व्यवस्था को ख़त्म करो
जाती व्यवस्था को ख़त्म करो
असमानता को ख़त्म करो
धार्मिक वाद ख़त्म करो
किसानो की आत्महत्या रोको
विजय माल्या  अगर रिश्तेदार नहीं तो उसे पकड़ ने को, सरकार पर दबाव बनाओ.
जहां औरतो को नंगी नचाया जाता है वह डांस बार बंद करो
औरत बियर बार में अद्नंगी नाचे किसीको कोई तकलीफ नहीं, औरत बिकिनी में क्लब के अन्दर पोल डांस करे किसीको कोई आपत्ति नहीं, औरत चकला में दर्जनों मर्दों के साथ सोये किसीको कोई तकलीफ नहीं, औरतो को शुद्र समझा जाता है किसीको कोई तकलीफ नहीं, लेकिन जब कोई मुस्लिम औरत अपने जिस्म को परदे से ढंकती है तो सबको आपत्ति होती है, तो यह उपरोक्त समस्या पहले ख़त्म करो.- संपादक"
(Naaz Sheikh, इनकी फेसबुक वाल से)